सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB), भारत सरकार ने 27 जनवरी 2026 को मसौदा सूचना प्रौद्योगिकी (डिजिटल कोड) नियम, 2026 प्रस्तावित किए, जिनसे ऑनलाइन सामग्री का विनियमन मौजूदा ढाँचों की तुलना में अधिक व्यापक रूप से होगा। मसौदा नियमों में पाँच-स्तरीय आयु-आधारित सामग्री वर्गीकरण प्रणाली दी गई है — U (सार्वभौमिक), U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A (वयस्क) — जो OTT सेवाओं, सोशल मीडिया मध्यस्थों, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म सहित सभी डिजिटल सामग्री प्लेटफ़ॉर्म पर लागू होगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को प्रकाशक माना जाएगा, जिससे वे समाचार मीडिया के समान नियामक ढाँचे के अंतर्गत आएंगे। ये नियम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित हैं और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाते हैं। भारत में 70 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के कारण डिजिटल सामग्री बाजार दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है।
MIB ने ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 प्रस्तावित किए: OTT, सोशल मीडिया और डिजिटल प्रकाशकों के लिए पाँच-स्तरीय आयु-आधारित सामग्री वर्गीकरण
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB), भारत सरकार ने 27 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट सूचना प्रौद्योगिकी (डिजिटल कोड) नियम, 2026 प्रस्तावित किए, जिनसे ऑनलाइन सामग्री पर मौजूदा ढाँचों की तुलना में अधिक व्यापक विनियमन लागू होगा। ड्राफ्ट नियमों में पाँच-स्तरीय आयु-आधारित सामग्री वर्गीकरण प्रणाली का प्रावधान है — U (सार्वभौमिक), U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A (वयस्क) — जो OTT सेवाओं, सोशल मीडिया मध्यस्थों, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म सहित सभी डिजिटल सामग्री प्लेटफ़ॉर्म पर लागू होगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रकाशक माना जाएगा, जिससे वे समाचार मीडिया के समान नियामक ढाँचे के अंतर्गत आएंगे। ये नियम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित हैं और अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाते हैं। भारत में 70 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और डिजिटल सामग्री बाजार दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है।
मुख्य तथ्य
- MIB ने 27 जनवरी को ऑनलाइन सामग्री के विनियमन के लिए ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम 2026 प्रस्तावित किए।
- पाँच-स्तरीय आयु वर्गीकरण: U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A (वयस्क) लागू होगा।
- नियम OTT, सोशल मीडिया, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन गेमिंग पर लागू होंगे।
- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को नए ढाँचे के तहत प्रकाशक माना जाएगा।
- नियम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित हैं।
- भारत में 70 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, इसलिए डिजिटल विनियमन अनिवार्य हो जाता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
स्रोत: Organiser / Lawctopus / PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MIB द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 क्या हैं?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने 27 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 प्रस्तावित किए, जो OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया मध्यस्थों, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन सामग्री को व्यापक रूप से विनियमित करेंगे। ये सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित हैं।
ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 के अंतर्गत कौन सी पाँच-स्तरीय सामग्री वर्गीकरण प्रणाली पेश की गई है?
नियमों में पाँच-स्तरीय आयु-आधारित वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है: U (सार्वभौमिक), U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A (वयस्क)। यह प्रणाली OTT सेवाओं, सोशल मीडिया, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म सहित सभी डिजिटल सामग्री प्लेटफॉर्म पर लागू होगी।
ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 के तहत सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को कैसे विनियमित किया जाएगा?
प्रस्तावित ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 के तहत सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को प्रकाशक माना जाएगा, जिससे वे डिजिटल समाचार प्रकाशकों और OTT प्लेटफॉर्म के समान नियामक ढाँचे के अंतर्गत आ जाएंगे।
ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 किस कानून के तहत प्रस्तावित हैं?
ड्राफ्ट IT (डिजिटल कोड) नियम, 2026 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 87(1) के तहत प्रस्तावित हैं। भारत में 70 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, इसलिए व्यापक डिजिटल विनियमन जरूरी भी है और जटिल भी।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें