ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 पर 17–21 मार्च 2026 के सप्ताह में लोकसभा में बहस हुई, जिसमें INDIA गठबंधन ने कड़ा विरोध जताया। यह विधेयक 2019 के ट्रांसजेंडर अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित करता है — सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि स्व-पहचान का प्रावधान हटाया जा रहा है, जिसके तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति बिना किसी चिकित्सीय प्रक्रिया के अपनी लैंगिक पहचान स्वयं घोषित कर सकते थे।

2019 के अधिनियम के अनुसार कोई ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट के पास स्व-घोषणा के आधार पर पहचान प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकता था। संशोधन विधेयक में इसकी जगह अनिवार्य चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन का प्रस्ताव है। विरोधियों का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के NALSA बनाम भारत संघ (2014) फैसले का उल्लंघन है, जिसमें लिंग पहचान के अधिकार को मान्यता दी गई थी।

INDIA गठबंधन के सांसदों ने विधेयक को संसदीय स्थायी समिति को भेजने की मांग की। उनका तर्क था कि यह विधेयक पिछड़ा कदम है और एक अत्यंत हाशिए पर खड़े समुदाय के अधिकारों को छीनता है। सरकार ने कहा कि ये संशोधन पहचान-प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग को रोकने और प्रशासनिक स्पष्टता के लिए जरूरी हैं।

RAS परीक्षा की दृष्टि से — ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 भारत का पहला व्यापक कानून था जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की रक्षा करता है। इसने राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की स्थापना की और शिक्षा, रोजगार व स्वास्थ्य में भेदभाव को प्रतिबंधित किया। 2026 का संशोधन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। 21 मार्च तक विधेयक की स्थिति लंबित थी।