भारत सरकार ने 26 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा की। यह सम्मान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार में उत्कृष्ट और प्रेरक योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और नवाचारकर्ताओं को मान्यता देता है। परीक्षा की दृष्टि से यह मुद्दा भारत की विज्ञान नीति, अनुसंधान परिवेश और राष्ट्रीय विकास में विज्ञान की भूमिका से जुड़ता है।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार चार श्रेणियों में दिए जाते हैं। विज्ञान रत्न किसी भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आजीवन उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देता है। विज्ञान श्री विशिष्ट योगदान के लिए है। विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर 45 वर्ष तक के युवा वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करता है। विज्ञान टीम तीन या अधिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं या नवाचारकर्ताओं की टीम को दिया जाता है। 2025 में विज्ञान रत्न प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर को भौतिकी में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत दिया गया। विज्ञान श्री में 8 वैज्ञानिक चुने गए, विज्ञान युवा में 14 नाम घोषित हुए और विज्ञान टीम के लिए सीएसआईआर का टीम-अरोमा मिशन चुना गया। इस प्रकार 23 व्यक्तिगत पुरस्कार और 1 टीम पुरस्कार घोषित हुए।

ये पुरस्कार 13 क्षेत्रों में दिए जाते हैं, जिनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग विज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अन्य संबद्ध क्षेत्र शामिल हैं। 2025 के लिए नामांकन 4 अक्टूबर से 17 नवंबर 2024 तक एक निर्धारित पोर्टल के ज़रिए लिए गए और प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारियों, विज्ञान विभागों के सचिवों, अकादमियों के प्रमुखों और विषय-विशेषज्ञों वाले पैनल से उनकी जांच हुई। प्रारंभिक परीक्षा में श्रेणी, संख्या, आयु-सीमा और प्रमुख पुरस्कार विजेता पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण अनुसंधान परिवेश, नवाचार और वैज्ञानिक उपलब्धियों को सम्मान देने की नीति से जोड़ा जा सकता है।