केंद्रीय बजट 2026 की कार्बन क्रेडिट पहल के विश्लेषण से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS) रोडमैप पर आधारित ₹20,000 करोड़ का कार्यक्रम सामने आया। यह कार्यक्रम बिजली उत्पादन, तेल रिफाइनरी, स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे उन उद्योगों को लक्षित करता है, जिनमें उत्सर्जन घटाना कठिन है। विशेषज्ञों ने यांत्रिक CCUS और कृषि कार्बन फार्मिंग के बीच भ्रम को लेकर सावधान किया। यह कार्यक्रम पेरिस समझौते के तहत भारत के संशोधित NDC लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें 2030 तक 2005 स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय बजट 2026 में CCUS रोडमैप पर आधारित ₹20,000 करोड़ के CCUS तकनीक कार्यक्रम की घोषणा
बजट 2026 में CCUS तकनीक से कठिन उद्योगों को लक्षित करने वाले ₹20,000 करोड़ के सीसीयूएस तकनीक कार्यक्रम की घोषणा की गई।
मुख्य तथ्य
- Union Budget 2026 में ₹20,000 करोड़ का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम DST के CCUS (कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण) पर आधारित है।
- यह कार्यक्रम उद्योगों को उत्सर्जन घटाने और कार्बन बाजार में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन देता है।
- 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के भारत के लक्ष्य की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
- कार्बन क्रेडिट बाजार उद्योगों को प्रदूषण कम करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देता है।
- भारत पेरिस समझौते के तहत 2030 तक 45% उत्सर्जन तीव्रता कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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19 जनवरी 2026 की यात्रा के दौरान भारत और UAE ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए किस लक्ष्य पर सहमति जताई?
19 जनवरी 2026 की उच्चस्तरीय बातचीत में भारत और UAE ने द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक दोगुना कर $200 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। इसलिए विकल्प A सही है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्रीय बजट 2026 का सीसीयूएस तकनीक कार्यक्रम क्या है और इसके लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
**केंद्रीय बजट 2026** में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के **कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण रोडमैप** पर आधारित **20,000 करोड़ रुपये के सीसीयूएस तकनीक कार्यक्रम** की घोषणा की गई। यह कार्यक्रम उन उद्योगों पर केंद्रित है जहां उत्सर्जन कम करना मुश्किल है — बिजली उत्पादन, तेल रिफाइनरी, स्टील, सीमेंट और रसायन।
CCUS क्या है और केंद्रीय बजट 2026 का CCUS कार्यक्रम किन उद्योगों पर केंद्रित है?
**कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (CCUS)** ऐसी तकनीक है जिसमें औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाली CO2 को वायुमंडल में पहुंचने से पहले पकड़ लिया जाता है और फिर उसे संग्रहीत या दोबारा उपयोग किया जाता है। बजट 2026 कार्यक्रम **पांच ऐसे उद्योगों** पर केंद्रित है जहां उत्सर्जन घटाना कठिन है: - **बिजली उत्पादन** संयंत्र - **तेल रिफाइनरी** - **स्टील** विनिर्माण - **सीमेंट** उत्पादन - **रसायन** उद्योग
बजट 2026 में घोषित भारत का सीसीयूएस तकनीक कार्यक्रम पेरिस समझौते के तहत उसकी प्रतिबद्धताओं से कैसे जुड़ता है?
भारत का **₹20,000 करोड़ CCUS कार्यक्रम** पेरिस समझौते के तहत उसके **संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC)** के अनुरूप है, जिसमें **2030 तक 2005 स्तर से 45% उत्सर्जन तीव्रता में कमी** का लक्ष्य रखा गया है। CCUS तकनीक उन उद्योगों को उत्सर्जन तीव्रता घटाने में मदद करती है जहाँ उत्सर्जन कम करना कठिन होता है।
औद्योगिक CCUS और कृषि कार्बन फार्मिंग में क्या अंतर है?
विशेषज्ञ दो अलग-अलग अवधारणाओं में भ्रम न करने की सलाह देते हैं: - **औद्योगिक CCUS**: कारखाने की चिमनियों से निकलने वाली सघन CO2 को मशीनों से पकड़ता है — **बिजली संयंत्रों, स्टील मिलों, रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त** - **कृषि कार्बन फार्मिंग**: खेती के तरीकों से मिट्टी में कार्बन बढ़ाती है — उत्सर्जन **विखरे हुए** होते हैं, इसलिए उन्हें मशीनों से पकड़ना **अनुपयुक्त** है बजट 2026 कार्यक्रम औद्योगिक CCUS का उपयोग करता है।
पेरिस समझौते के तहत उत्सर्जन में कमी के लिए भारत का संशोधित NDC लक्ष्य क्या है?
पेरिस समझौते के तहत भारत के **संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC)** में **2030 तक 2005 स्तर से 45% उत्सर्जन तीव्रता में कमी** (GDP की प्रति इकाई उत्सर्जन) का लक्ष्य रखा गया है। यह उत्सर्जन तीव्रता का लक्ष्य है, कुल उत्सर्जन में कटौती का नहीं। यानी भारत आर्थिक विकास जारी रखते हुए प्रति इकाई आर्थिक उत्पादन पर कार्बन पदचिह्न कम कर सकता है।
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