भारत-नीदरलैंड ने 19 IIT के साथ ग्रीन हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया
Aसीधा उत्तर
डीएसटी और ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय ने 19 IIT के साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन फेलोशिप शुरू की; यह राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से जुड़ी है।
मुख्य तथ्य
डीएसटी ने 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया।
हरित हाइड्रोजन पर साझा अनुसंधान के लिए ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड) और 19 भारतीय IIT के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
यह कार्यक्रम भारतीय पीएचडी विद्वानों, पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों के लिए उपलब्ध है।
हाइड्रोजन प्रणाली एकीकरण, सुरक्षा मानकों और तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण पर ध्यान केंद्रित है।
यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और 2047 तक भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता के दृष्टिकोण के अनुरूप है; जोधपुर-बाड़मेर क्षेत्र में प्रमुख हरित हाइड्रोजन केंद्रों की योजनाओं के कारण राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किया। ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय (नीदरलैंड) और 19 भारतीय IIT के बीच ग्रीन हाइड्रोजन पर सहयोगी अनुसंधान के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस कार्यक्रम में भारतीय पीएचडी शोधार्थी, पोस्टडॉक शोधकर्ता और संकाय सदस्य भाग ले सकते हैं। इसका फोकस हाइड्रोजन प्रणालियों के एकीकरण, सुरक्षा मानकों और तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण पर है। यह राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, जहां जोधपुर-बाड़मेर क्षेत्र में प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन हब की योजना है।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2024 भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्य क्या हैं? — दोनों राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़े हैं — यह फेलोशिप उसके अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान स्तंभ को क्रियान्वित करती है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 6 फरवरी 2026 को शुरू भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम के भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्व का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
डीएसटी ने 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप शुरू की। यह 19 IIT को ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय से हाइड्रोजन प्रणाली एकीकरण, सुरक्षा मानकों और तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण के क्षेत्र में जोड़ेगी। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और ऊर्जा स्वतंत्रता 2047 दृष्टि से जुड़ी यह पहल राजस्थान के जोधपुर-बाड़मेर केंद्र को सशक्त करेगी।
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फरवरी 2026 में शुरू हुआ भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम क्या है?
**भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम** को **विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी)** ने **6 फरवरी 2026** को नई दिल्ली में लॉन्च किया। हरित हाइड्रोजन पर सहयोगी अनुसंधान के लिए **यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन (नीदरलैंड)** और **19 भारतीय IIT** के बीच MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत-नीदरलैंड ग्रीन हाइड्रोजन फेलोशिप के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
इस कार्यक्रम में **भारतीय पीएचडी शोधार्थी, पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता और संकाय सदस्य** आवेदन कर सकते हैं। यह राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप हाइड्रोजन प्रणाली एकीकरण, सुरक्षा मानकों और तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण पर केंद्रित है।
भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप भारत के ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप कैसे है?
यह फेलोशिप **राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन** और भारत के **2047 तक ऊर्जा स्वतंत्रता** के लक्ष्य के अनुरूप है। यह हाइड्रोजन प्रणाली एकीकरण और सुरक्षा मानकों पर अनुसंधान को बढ़ावा देती है।
भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन में राजस्थान का क्या महत्व है?
राजस्थान का भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन में रणनीतिक महत्व है क्योंकि यहां **प्रचुर सौर और पवन ऊर्जा संसाधन** हैं जो हरित हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर को ऊर्जा दे सकते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन फेलोशिप के लिए 19 IIT के साथ किस डच विश्वविद्यालय ने साझेदारी की?
**यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन, नीदरलैंड** ने DST द्वारा 6 फरवरी 2026 को शुरू किए गए भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप कार्यक्रम के तहत हरित हाइड्रोजन पर संयुक्त शोध के लिए **19 भारतीय IIT** के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए।
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