प्रकाशित: 4 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
सरकार ने ₹2 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के लिए एकीकृत ई-बिल प्रणाली शुरू की
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने लगभग ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी को डिजिटल तरीके से निपटाने के लिए एकीकृत ई-बिल प्रणाली शुरू की। यह प्रणाली कागज आधारित मैन्युअल प्रक्रियाओं की जगह iFMS और PFMS द्वारा संयुक्त रूप से विकसित पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रवाह लागू करती है।
ई-बिल प्रणाली से पारदर्शिता, तेज मंजूरी, कम कागजी कार्रवाई और बेहतर वित्तीय शासन सुनिश्चित होता है। उर्वरक कंपनियां डिजिटल रूप से बिल जमा करेंगी, जिनका स्वचालित सत्यापन होगा और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह प्रणाली सब्सिडी भुगतान में देरी को लेकर उद्योग की शिकायतों को दूर करती है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
उर्वरक सब्सिडी के डिजिटल प्रसंस्करण के लिए शुरू की गई एकीकृत ई-बिल प्रणाली में कौन-से दो सिस्टम शामिल हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Aई-बिल प्रणाली को एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली ने संयुक्त रूप से विकसित किया। इसका उद्देश्य प्रतिवर्ष लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का डिजिटल प्रसंस्करण करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जे.पी. नड्डा द्वारा उर्वरक सब्सिडी के लिए शुरू की गई एकीकृत ई-बिल प्रणाली क्या है?
**केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा** ने लगभग **₹2 लाख करोड़ वार्षिक उर्वरक सब्सिडी** को डिजिटल तरीके से संसाधित करने के लिए **एकीकृत ई-बिल प्रणाली** शुरू की। यह **iFMS और PFMS** द्वारा संयुक्त रूप से विकसित **डिजिटल वर्कफ्लो** से हाथ से होने वाली प्रक्रियाओं की जगह लेती है।
उर्वरक सब्सिडी के लिए एकीकृत ई-बिल प्रणाली ने क्या समस्याएं हल कीं?
**एकीकृत ई-बिल प्रणाली** ने **पारदर्शिता, जल्दी मंजूरी, कम कागजी कार्रवाई** और उर्वरक निर्माताओं की **सब्सिडी भुगतान में देरी** की शिकायतें हल कीं। अब उर्वरक कंपनियां **डिजिटल बिल** जमा करती हैं जिनका स्वचालित सत्यापन होता है।
उर्वरक ई-बिल प्रणाली सब्सिडी वितरण को कैसे बेहतर बनाती है?
**एकीकृत ई-बिल प्रणाली** के जरिए उर्वरक कंपनियां **स्वचालित सत्यापन और भुगतान के साथ डिजिटल बिल** जमा करती हैं। **iFMS और PFMS** द्वारा विकसित यह प्रणाली **₹2 लाख करोड़** की वार्षिक सब्सिडी में **पारदर्शिता बढ़ाती है और देरी कम करती है**।
भारत की उर्वरक ई-बिल प्रणाली को किन दो प्रणालियों ने संयुक्त रूप से विकसित किया?
**उर्वरक ई-बिल प्रणाली** को **iFMS (एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली, उर्वरक विभाग)** और **PFMS (सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली, वित्त मंत्रालय)** ने संयुक्त रूप से विकसित किया। यह **₹2 लाख करोड़** वार्षिक सब्सिडी संसाधित करती है।
उर्वरक सब्सिडी के लिए एकीकृत ई-बिल प्रणाली क्यों जरूरी थी?
**उर्वरक ई-बिल प्रणाली** जरूरी थी क्योंकि **सब्सिडी के भुगतान में देरी** से उर्वरक निर्माताओं की **कार्यशील पूंजी** प्रभावित हो रही थी। **₹2 लाख करोड़** की हाथ से चलने वाली प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी। **iFMS और PFMS** के आधार पर डिजिटल प्रणाली बनाई गई।