केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 मार्च 2026 को 'प्रारंभ 2026' (विकसित भारत मिशन के लिए नीति सुधार और उत्तरदायी कार्रवाई) शुरू किया। आयकर विभाग का यह देशव्यापी जागरूकता अभियान नागरिकों को नए आयकर अधिनियम 2025 के बारे में जानकारी देता है। यह अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा।

नए अधिनियम में 800 से अधिक धाराओं को घटाकर 536 और 47 अध्यायों को घटाकर 23 किया गया है। इससे भारत की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था सरल होती है, कानून को समझना आसान होता है और मुकदमेबाज़ी घटती है। अभियान नागरिक-केंद्रित शासन के 'नागरिक देवो भव' सिद्धांत पर आधारित है।

अभियान की मुख्य विशेषताएँ हैं: (1) 'कर साथी' — कृत्रिम बुद्धिमत्ता से चलने वाला चैटबॉट, जो बेहतर बनाई गई आयकर वेबसाइट 2.0 पर नए अधिनियम, नियमों, प्रपत्रों और उनसे जुड़े सवालों के जवाब 12 भारतीय भाषाओं में 24×7 देता है; (2) आयकर वेबसाइट 2.0 — इसमें जानकारी और सेवाएँ पाना आसान बनाया गया है; (3) देशभर में 300 से अधिक कार्यशालाओं की योजना; (4) 10 क्षेत्रीय भाषाओं में ब्रोशर; और (5) मायगव प्रश्नोत्तरी सहित प्रिंट, टेलीविज़न, रेडियो, डिजिटल और बाहरी माध्यमों से प्रचार।

65 वर्ष पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेने वाला नया कानून स्थिर, सरल और भरोसे पर आधारित कर व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दिखाता है। यह प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' दृष्टिकोण का एक प्रमुख आधार है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा कृषि की बड़ी भूमिका है। कर कानून की सरल भाषा औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़े छोटे व्यापारियों और किसानों पर अनुपालन का बोझ सीधे कम करती है।