संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने 'रनिंग ऑन एम्प्टी' शीर्षक से अनुकूलन अंतर रिपोर्ट 2025 जारी की। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विकासशील देशों को 2035 तक जलवायु अनुकूलन के लिए हर साल 310-365 अरब डॉलर की ज़रूरत है, लेकिन अभी केवल 26 अरब डॉलर मिल रहे हैं। यह ज़रूरत से 12-14 गुना कम है। अनुकूलन वित्त 2022 में 28 अरब डॉलर था, जो अब घटकर 26 अरब डॉलर रह गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अभी जितना वित्त मिल रहा है, उसे देखते हुए ग्लासगो जलवायु समझौते के लक्ष्य पूरे होने की संभावना कम है। भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शुद्ध-शून्य स्तर पर लाने की प्रतिबद्धता जताई है और वह हरित जलवायु कोष तथा द्विपक्षीय माध्यमों से सबसे अधिक जलवायु वित्त पाने वाले देशों में से एक है। राजस्थान मरुस्थलीकरण, पानी की कमी और लू के कारण विशेष रूप से संवेदनशील है। राज्य की अनुकूलन योजना में सूखे से बचाव, जल संचयन और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल शामिल है।