अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने अक्टूबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये, यानी लगभग 12 अरब डॉलर, के अनुसंधान-विकास-नवाचार कोष की स्थापना को मंजूरी दी। यह कोष निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है, खासकर डीप-टेक और बड़े प्रभाव वाली परियोजनाओं में। प्रीलिम्स में कोष की राशि, फाउंडेशन की संरक्षक भूमिका, वित्तीय मार्ग और प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 4+ सीधे पूछे जा सकते हैं; मुख्य परीक्षा में यह निजी शोध निवेश और डीप-टेक क्षमता से जुड़ता है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस कोष की घोषणा की। इसकी खास बात यह है कि पूंजी सीधे परियोजनाओं में नहीं लगाई जाएगी, बल्कि वैकल्पिक निवेश कोषों, विकास वित्त संस्थाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के ज़रिए पहुंचेगी। एएनआरएफ इस राशि का संरक्षक होगा। इससे सरकार का जोर एक ऐसे वित्तीय तंत्र पर दिखता है जो निजी अनुसंधान को लंबी अवधि की पूंजी दे सके।

यह कोष प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 4+ परियोजनाओं को लक्षित करता है, यानी उन परियोजनाओं को जो तकनीक को प्रयोग से उपयोग तक ले जाने और स्केलिंग के चरण में हैं। इनके लिए लंबी अवधि और संभवतः बिना गिरवी वित्तपोषण की व्यवस्था बताई गई है। प्रीलिम्स में याद रखने वाले मुख्य बिंदु हैं: कोष की राशि, स्वीकृति देने वाली संस्था, घोषणा करने वाले मंत्री, वित्तीय मार्ग और प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 4+ पर फोकस। मुख्य परीक्षा में इसकी प्रासंगिकता नवाचार वित्तपोषण, अनुसंधान में निजी क्षेत्र की भागीदारी, डीप-टेक क्षमता और बड़े प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक पूंजी की संरचना से है।