सुप्रीम कोर्ट ने वनशक्ति मामले में 16 मई 2025 के अपने निर्णय को वापस ले लिया। उस निर्णय में पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी पर रोक लगाई गई थी, यानी ऐसी मंजूरी जिसे परियोजना शुरू होने के बाद दी जाए। 19 नवंबर 2025 को प्रकाशित इस घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा विकास और पर्यावरणीय नियमों के पालन के संतुलन से जुड़ा है। बहुमत का मानना था कि रोक जारी रहने से पहले से चल रही सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।

न्यायमूर्ति भुयान ने असहमति जताई। उनका तर्क था कि ऐसी छूट उचित पर्यावरण मंजूरी के बिना शुरू हुई परियोजनाओं को लाभ देकर अवैध व्यवहार को बढ़ावा दे सकती है। इसलिए यह फैसला पर्यावरण कानून, प्रशासनिक विवेक और जवाबदेही के बीच तनाव को दिखाता है। स्टैटिक जीके से जोड़ें तो यह पर्यावरण मंजूरी, पर्यावरण प्रभाव आकलन, सतत विकास, प्रदूषक-भुगतान सिद्धांत और न्यायिक समीक्षा जैसे विषयों से जुड़ता है। नीति के स्तर पर इसका केंद्रीय प्रश्न यह है कि नियमों के उल्लंघन को नियमित करते समय दंड, सुधारात्मक कदम और भविष्य की रोकथाम कितनी मजबूत होनी चाहिए।

राजस्थान के लिए इसका महत्व इसलिए है कि अरावली क्षेत्र जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाकों में राजमार्ग परियोजनाओं और खनन गतिविधियों पर पर्यावरण मंजूरी का प्रश्न बार-बार उठता है। परीक्षा के दृष्टिकोण से यह मुद्दा RAS/UPSC में पर्यावरण, शासन और संविधान से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है। प्रारंभिक परीक्षा में तथ्यात्मक प्रश्न पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी, वनशक्ति निर्णय और असहमति वाले मत पर आ सकते हैं। मुख्य परीक्षा में विकास परियोजनाओं, पर्यावरणीय सुरक्षा और कानून के शासन के बीच संतुलन पर विश्लेषणात्मक उत्तर बन सकता है।