भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को बिहार और अन्य राज्यों में भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। पीठ ने चार व्यापक कानूनी प्रश्न तय किए: (1) क्या ईसीआई के पास एसआईआर कराने का अधिकार था; (2) क्या प्रक्रिया आनुपातिक और कानूनी रूप से उचित थी; (3) क्या यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन करती है; और (4) क्या चुनाव निकाय मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान नागरिकता से जुड़े मुद्दों की जांच कर सकता है। न्यायालय ने सभी चार प्रश्नों का उत्तर ईसीआई के पक्ष में दिया। नागरिकता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पर न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि आयोग मतदाता सूची तैयार या संशोधित करते समय नागरिकता से संबंधित प्रश्नों की जांच करने में सक्षम है, लेकिन ऐसी जांच केवल यह तय करने तक सीमित रहनी चाहिए कि नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या हटाया जाए। साथ ही, जिस मतदाता का नाम पहले से सूची में मौजूद है, उसके पक्ष में मानी जाने वाली धारणा को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रक्रिया में किसी भी नाम को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी प्रक्रियात्मक सुरक्षा शामिल थी। यह मामला बिहार में एसआईआर को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं से सामने आया, जहां ईसीआई ने कथित तौर पर पुनरीक्षण के दौरान मसौदा मतदाता सूची से लगभग 65 लाख नाम हटाए। न्यायालय ने माना कि एसआईआर अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से जुड़ा है, जिसके तहत चुनावों का अधीक्षण निर्वाचन आयोग को सौंपा गया है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधता बरकरार रखी। न्यायालय ने माना कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के सीमित उद्देश्य से नागरिकता दावों की जांच करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक शक्तियों के दायरे में है। न्यायालय ने यह भी फैसला दिया कि एसआईआर प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 का उल्लंघन नहीं करती और स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से जुड़ी है
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को ईसीआई द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखा, यह मानते हुए कि आयोग मतदाता सूची में शामिल करने या बाहर करने के सीमित उद्देश्य के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है। प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 का उल्लंघन नहीं करती।
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता बरकरार रखी
- माना कि भारत के निर्वाचन आयोग को एसआईआर प्रक्रिया चलाने का अधिकार है
- ईसीआई मतदाता सूची में नाम शामिल करने या बाहर करने के सीमित उद्देश्य से नागरिकता की जांच करने के लिए अधिकृत है
- प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अनुरूप मानी गई
- प्रक्रियात्मक सुरक्षा के तहत नाम हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना अनिवार्य है
- मामला बिहार में एसआईआर से जुड़ी चुनौतियों से उठा, जहाँ ईसीआई ने मसौदा मतदाता सूची से लगभग 65 लाख नाम हटाए
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
26 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय ने माना कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन आयोग के पास नागरिकता की जांच का कोई अधिकार नहीं है। 2. न्यायालय ने माना कि एसआईआर प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन करती है। 3. न्यायालय ने माना कि मतदाता सूची से किसी भी विलोपन से पहले कारण बताओ नोटिस होना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल कथन 3 सही है। 26 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने माना: (1) ECI मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने के सीमित उद्देश्य से नागरिकता की जांच कर सकता है (इसलिए कथन 1 गलत है); (2) SIR जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन नहीं करता है, बल्कि इसे अधिनियम के अनुरूप माना गया (इसलिए कथन 2 गलत है); (3) न्यायालय ने किसी भी नाम को हटाने से पहले अनिवार्य कारण बताओ नोटिस सहित प्रक्रियात्मक सुरक्षाओं पर बल दिया (कथन 3 सही है)।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
26 मई 2026 को मतदाता सूची के एसआईआर के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने क्या निर्णय दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने ईसीआई द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को बरकरार रखा। न्यायालय ने माना कि आयोग एसआईआर कराने और मतदाता सूची में शामिल करने या बाहर करने के सीमित उद्देश्य से नागरिकता के दावों की जांच करने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों के दायरे में काम कर रहा है।
एसआईआर मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तैयार किए गए चार कानूनी प्रश्न क्या हैं?
पीठ ने इन प्रश्नों पर विचार किया: (1) क्या ईसीआई को एसआईआर कराने का अधिकार था; (2) क्या प्रक्रिया आनुपातिक और कानूनी रूप से उचित थी; (3) क्या यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन करती है; और (4) क्या निर्वाचन आयोग मतदाता सूची सत्यापन के दौरान नागरिकता से जुड़े प्रश्नों की जांच कर सकता है।
एसआईआर प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय ने किन प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों पर बल दिया?
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नागरिकता से जुड़ी कोई भी जांच मौजूदा मतदाता के पक्ष में विधिक अनुमान का सम्मान करते हुए की जानी चाहिए, और किसी भी विलोपन से पहले मतदाता को सुनवाई का अवसर देने वाला कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए।
किस संवैधानिक प्रावधान के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची पुनरीक्षण की शक्तियां प्राप्त हैं?
निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण प्राप्त है। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य के तहत एसआईआर प्रक्रिया इसी शक्ति से जुड़ी है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें