प्रकाशित: 27 जनवरी 2026शासन
लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण पर संवैधानिक रोक जनगणना 2027 के बाद समाप्त; परिसीमन बहस तेज
28 जनवरी 2026 को बजट सत्र शुरू होते ही लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर बहस तेज हो गई। 42वें संशोधन (1976) द्वारा लगाई गई और 84वें संशोधन (2001) द्वारा 2026 के बाद पहली जनगणना तक बढ़ाई गई संवैधानिक रोक का अर्थ है कि 2027 की जनगणना पांच दशकों में पहली बार संसदीय सीटों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया शुरू करेगी।
कम प्रजनन दर वाले दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की तुलना में उनकी सीटें घट सकती हैं। वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि परिसीमन से 150-200 नई सीटें जुड़ सकती हैं।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. परिसीमन पर संवैधानिक रोक 42वें संशोधन (1976) द्वारा लगाई गई थी।
2. इस रोक को 84वें संशोधन (2001) द्वारा 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया गया।
3. वर्तमान 543 लोकसभा सीटें 1971 की जनगणना के बाद से सीमित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Dतीनों कथन सही हैं। 42वें संवैधानिक संशोधन ने राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के पुनर्समायोजन को 1971 की जनगणना के आधार पर रोक दिया था। 84वें संशोधन ने इस रोक को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने तक बढ़ा दिया। इसलिए लोकसभा की निर्वाचित सीटों की संख्या प्रभावी रूप से 1971 की जनगणना के आधार पर 543 पर सीमित रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में लोकसभा परिसीमन क्यों बड़ा विवाद का विषय बना हुआ है?
**42वें संशोधन (1976)** द्वारा लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण पर रोक लगाई गई थी, जिसे **84वें संशोधन (2001)** द्वारा 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया गया। **जनगणना 2027** पाँच दशकों में पहली बार परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करेगी, जिससे **150–200 नई सीटें** जुड़ सकती हैं और राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।
परिसीमन के बाद कौन से राज्यों को लोकसभा सीटें खोने का डर है और क्यों?
**दक्षिणी राज्य** — तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक — को सीटें खोने का डर है क्योंकि उनकी **जनसंख्या वृद्धि दर कम** है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की जनसंख्या अधिक है, इसलिए वे जनसंख्या आधारित आवंटन में फायदे में रहेंगे।
भारत में वर्तमान में लोकसभा सीटों की संख्या कितनी है और यह कब से तय है?
भारत में वर्तमान में **543 लोकसभा सीटें** हैं, जो **1971 की जनगणना** के आधार पर तय की गई थीं। जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने के लिए संवैधानिक संशोधनों के जरिए सीटों की संख्या स्थिर रखी गई।
परिसीमन पर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार क्या विकल्प तलाश रही है?
सरकार **जनसंख्या और विकास सूचकांक पर आधारित आवंटन** फार्मूले पर विचार कर रही है, जिसमें जनसंख्या के साथ-साथ साक्षरता, HDI और आर्थिक उत्पादन जैसे विकास संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
लोकसभा परिसीमन पर संवैधानिक रोक कब समाप्त होती है?
रोक **जनगणना 2027** के पूरा होने के बाद समाप्त होगी। **84वें संवैधानिक संशोधन (2001)** ने इस रोक को 2026 के बाद की पहली जनगणना तक बढ़ाया था, यानी अगला परिसीमन **1970 के दशक** के बाद पहली बार होगा।