प्रकाशित: 20 जनवरी 2026टॉपिक
भारत का जनसांख्यिकीय विभाजन: 2051 तक जनसंख्या 159 करोड़; परिसीमन को लेकर चिंताएँ
21 जनवरी 2026 को एक प्रमुख विश्लेषण ने भारत के जनसांख्यिकीय विभाजन को रेखांकित किया — 2051 तक जनसंख्या 159 करोड़, कामकाजी आयु की जनसंख्या (15-59) 2041 में 101 करोड़ पर सबसे अधिक होगी। देश के सामने वृद्ध होते दक्षिण और युवा उत्तर के बीच तीखा क्षेत्रीय विभाजन है।
केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों की प्रजनन दर 2.1 से नीचे है, 2036 तक बुजुर्गों की हिस्सेदारी 23-25% होगी। बिहार और UP जैसे उत्तरी राज्यों में हर तीन में से एक बच्चा 14 से कम उम्र का है। 2026 परिसीमन 40+ लोकसभा सीटें दक्षिण से उत्तर में स्थानांतरित कर सकता है। स्कूल नामांकन 2019-2025 में 1.34 करोड़ घटा, 80,000+ स्कूल बंद हुए या विलय किए गए। राजस्थान, जहां प्रजनन दर घट रही है लेकिन अभी भी प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर है, दोनों गतिशीलताओं के बीच है।
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कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क (GBF) 2030 तक कितने प्रतिशत भूमि और समुद्र की रक्षा का लक्ष्य निर्धारित करता है?
व्याख्या · सही उत्तर Cकुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क का लक्ष्य 3 '30x30' संरक्षण लक्ष्य है। इसके अनुसार 2030 तक स्थलीय और अंतर्देशीय जल क्षेत्रों के कम-से-कम 30% तथा समुद्री और तटीय क्षेत्रों के कम-से-कम 30% हिस्से का प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन होना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2051 तक भारत की जनसंख्या कितनी होने का अनुमान है?
हाल के जनसांख्यिकीय अध्ययनों के अनुसार, **2051 तक भारत की जनसंख्या 1.59 अरब** तक पहुंच सकती है। इससे देश में **जनसांख्यिकीय विभाजन** और गहरा हो सकता है — उत्तर के राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार) में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है जबकि दक्षिण के राज्य (तमिलनाडु, केरल) प्रतिस्थापन स्तर पर आ गए हैं।
भारत में जनसांख्यिकीय विभाजन क्या है?
**जनसांख्यिकीय विभाजन** से तात्पर्य अधिक प्रजनन दर वाले उत्तरी राज्यों (UP, बिहार, MP, राजस्थान) और कम प्रजनन दर वाले दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश) के बीच के अंतर से है। **कुल प्रजनन दर (TFR)** का राष्ट्रीय औसत लगभग 2.0 है, परंतु राज्यों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
परिसीमन (Delimitation) पर जनसांख्यिकीय विभाजन का क्या प्रभाव पड़ेगा?
**परिसीमन** — संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण — 2026 के बाद संवैधानिक रूप से निर्धारित है। अधिक जनसंख्या वाले उत्तरी राज्यों को अधिक लोकसभा सीटें मिलेंगी, जबकि जनसंख्या नियंत्रण में सफल **दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है**, जो एक विवादास्पद संघीय मुद्दा बन सकता है।
कुल प्रजनन दर (TFR) क्या है और भारत में इसकी स्थिति क्या है?
**कुल प्रजनन दर (TFR)** किसी महिला के जीवनकाल में औसतन जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या है। **2.1 प्रतिस्थापन स्तर** है। भारत की राष्ट्रीय TFR लगभग **2.0** है — बिहार और UP में 2.5 से अधिक, जबकि तमिलनाडु और केरल में 1.6 से नीचे।
भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश से जुड़ी नीतिगत चुनौतियाँ क्या हैं?
भारत का **जनसांख्यिकीय लाभांश** — बड़ी कार्यशील आयु की जनसंख्या — अवसर और दबाव दोनों लाता है। प्रमुख चुनौतियों में **प्रतिवर्ष लाखों युवाओं के लिए रोज़गार सृजन**, बुजुर्ग होते दक्षिणी राज्यों के लिए सामाजिक सुरक्षा, अंतर-राज्यीय प्रवासन प्रबंधन, और **परिसीमन विवाद** का समाधान शामिल हैं।