प्रकाशित: 24 फ़रवरी 2026Down to Earth / CSEपर्यावरण
CSE की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2026 रिपोर्ट का विमोचन निमली, राजस्थान में अनिल अग्रवाल डायलॉग के दौरान हुआ
CSE ने 25 फरवरी 2026 को राजस्थान के निमली में आयोजित अनिल अग्रवाल डायलॉग में अपनी प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट — स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट (SoE) 2026 — जारी की। रिपोर्ट के अनुसार 2025 भारत में चरम मौसमी घटनाओं के लिहाज से अब तक का सबसे खराब वर्ष रहा। वर्ष 2025 में 99% दिनों पर चरम मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे 4,419 लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि नौ में से छह ग्रहीय सीमाएं (Planetary Boundaries) पहले ही पार हो चुकी हैं, जो पृथ्वी की प्रणालियों के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
रिपोर्ट में भारत की जलवायु शासन प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया है — प्रतिक्रियाशील आपदा प्रबंधन से हटकर सक्रिय और लचीले जलवायु शासन की ओर बढ़ना। रिपोर्ट की सिफारिश है कि जलवायु जोखिम आकलन को सभी विकास योजनाओं में शामिल किया जाए, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत किया जाए और हरित बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाए। निमली, राजस्थान को डायलॉग के स्थान के रूप में चुनना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजस्थान सूखे, लू और अनिश्चित मानसून जैसी जलवायु चुनौतियों से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट (SoE) रिपोर्ट क्या है?
SoE, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक प्रमुख रिपोर्ट है। यह भारत के पर्यावरण स्वास्थ्य का व्यापक विश्लेषण प्रदान करती है, जिसमें जलवायु, वन, जल, वायु गुणवत्ता और शासन शामिल हैं। यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और सिविल सेवा अभ्यर्थियों द्वारा व्यापक रूप से संदर्भित की जाती है।
2025 को भारत में अत्यधिक मौसम के लिए सबसे खराब वर्ष क्यों माना गया?
SoE 2026 के अनुसार, 2025 में 99% दिनों पर अत्यधिक मौसमी घटनाएं दर्ज की गईं — अब तक की सर्वाधिक — जिससे 4,419 लोगों की मौत हुई। इन घटनाओं में लू, बाढ़, चक्रवात और असामयिक वर्षा शामिल थी, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
ग्रहीय सीमाएं क्या हैं और कौन-सी पार हो चुकी हैं?
ग्रहीय सीमाएं नौ पृथ्वी-प्रणाली प्रक्रियाओं के लिए वैज्ञानिक रूप से परिभाषित सीमाएं हैं। इन्हें पार करने से पृथ्वी अस्थिर हो सकती है। SoE 2026 के अनुसार छह सीमाएं पार हो चुकी हैं: जैवमंडल अखंडता, भू-प्रणाली परिवर्तन, मीठे पानी का उपयोग, जैव-रासायनिक प्रवाह (नाइट्रोजन और फास्फोरस चक्र), जलवायु परिवर्तन, और नवीन इकाइयां (सिंथेटिक रसायन, प्लास्टिक)।
रिपोर्ट के अनुसार सक्रिय जलवायु शासन का क्या अर्थ है?
सक्रिय जलवायु शासन का अर्थ है आपदाओं के होने से पहले ही जलवायु जोखिम आकलन को सभी विकास योजनाओं में शामिल करना, न कि केवल आपदा के बाद प्रतिक्रिया देना। इसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना, हरित बुनियादी ढांचे में निवेश और कमजोर समुदायों को जलवायु अनुकूलन रणनीतियों के केंद्र में रखना शामिल है।
राजस्थान में अनिल अग्रवाल डायलॉग आयोजित करने का क्या महत्व है?
राजस्थान भारत के सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील राज्यों में से एक है, जो अक्सर सूखे, लू, मरुस्थलीकरण और अनिश्चित मानसून से प्रभावित होता है। निमली, राजस्थान में इस संवाद को आयोजित करना राज्य की जमीनी जलवायु चुनौतियों को उजागर करता है और जलवायु प्रभाव में क्षेत्रीय असमानताओं पर ध्यान आकर्षित करता है।