केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 19 नवंबर 2025 को BIRSA 101 लॉन्च किया। CRISPR तकनीक पर आधारित यह सिकल सेल रोग (SCD) के लिए भारत की पहली स्वदेशी जीन थेरेपी है। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के जीनोमिक्स एवं समेकित जीवविज्ञान संस्थान (IGIB) ने इसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर विकसित किया है। इसका नाम जनजातीय नेता बिरसा मुंडा के नाम पर रखा गया है।

BIRSA 101 CRISPR तकनीक से उस आनुवंशिक बदलाव को ठीक करती है जिसके कारण लाल रक्त कोशिकाएँ दरांती जैसी हो जाती हैं। इससे एक बार में ऐसा इलाज मिलने की संभावना है जिसका लाभ जीवन भर बना रहे। दुनिया में सिकल सेल रोग की जीन थेरेपी पर ₹20-25 करोड़ खर्च होते हैं, जबकि BIRSA 101 की लागत लगभग ₹50 लाख रखने का लक्ष्य है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के प्रतिभागियों के साथ नैदानिक परीक्षण 2026 में शुरू होंगे। इस रोग का असर जनजातीय आबादी पर बाकी आबादी की तुलना में ज़्यादा पड़ता है; गोंड, मुंडा, भील और संताल समुदाय इसके उदाहरण हैं।