प्रकाशित: 6 जनवरी 2026पर्यावरण
UN ने 2026 को चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष (IYRP) घोषित किया, जिससे पृथ्वी की भूमि सतह के लगभग 40% हिस्से पर फैले और अपना 90% कार्बन भूमिगत संग्रहित करने वाले घास के मैदानों पर फिर से वैश्विक ध्यान गया। घोषणा में कहा गया कि जलवायु वार्ताओं में वनों को प्राथमिकता मिलती रहती है, जबकि घास के मैदानों की शमन क्षमता की उपेक्षा होती है।
भारत के घास के मैदान लगभग 1.2 करोड़ हेक्टेयर में फैले हैं और राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश तथा कर्नाटक के चरवाहा समुदायों को सहारा देते हैं। पश्चिमी राजस्थान के थार रेगिस्तान की सेवण घास पशुपालन के लिए महत्वपूर्ण है। वनों के तुलनीय कार्बन-सिंक मूल्य के बावजूद अधिकांश NDC घास के मैदानों को शामिल नहीं करते।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UN ने 2026 को चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष (IYRP) क्यों घोषित किया?
**UN** ने **2026 को चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष (IYRP)** इसलिए घोषित किया, ताकि उन घास के मैदानों पर दुनिया का ध्यान जाए जो पृथ्वी की भूमि सतह का लगभग **40%** हिस्सा हैं और अपना **90% कार्बन** भूमिगत जमा रखते हैं। जलवायु वार्ताओं में वनों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि घास के मैदानों की शमन क्षमता की उपेक्षा होती है। अधिकांश **NDC** में घास के मैदान शामिल नहीं हैं।
घास के मैदान पृथ्वी की भूमि सतह का कितना प्रतिशत हिस्सा हैं और वे कितना कार्बन संग्रहित करते हैं?
घास के मैदान पृथ्वी की भूमि सतह का लगभग **40%** हिस्सा हैं और अपना **90% कार्बन भूमिगत** संग्रहित करते हैं; इसलिए वे वनों के बराबर **कार्बन सिंक** हैं। **UN के IYRP 2026 की घोषणा** ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु वार्ताओं में वनों को प्राथमिकता मिलती है। अधिकांश **NDC** में घास के मैदान शामिल नहीं हैं। IYRP राष्ट्रों से **घास के मैदानों के संरक्षण** और **चरवाहों के पारंपरिक ज्ञान** को मान्यता देने का आह्वान करता है।
भारत में घास के मैदानों का क्षेत्रफल कितना है और कौन से राज्यों में प्रमुख पशुपालक समुदाय हैं?
भारत के घास के मैदान लगभग **1.2 करोड़ हेक्टेयर** में फैले हैं। **राजस्थान**, **गुजरात**, **मध्य प्रदेश** और **कर्नाटक** में इनसे पशुपालक समुदायों को सहारा मिलता है। पश्चिमी राजस्थान के **थार रेगिस्तान** की **सेवण घास** के मैदान **पशुपालन** के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। **UN ने 2026 को IYRP** घोषित किया क्योंकि अधिकांश **NDC** में घास के मैदानों को, उनके **कार्बन सिंक के रूप में महत्व** के बावजूद, शामिल नहीं किया जाता।
UN IYRP 2026 के संदर्भ में राजस्थान के सेवण घास के मैदानों का क्या महत्व है?
पश्चिमी राजस्थान के **थार रेगिस्तान** के **सेवण घास के मैदान** क्षेत्र में **पशुपालन** के लिए महत्वपूर्ण हैं। **UN के अंतरराष्ट्रीय चरागाह और चरवाहा वर्ष (IYRP) 2026** के संदर्भ में ये उन घास के मैदानों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता है: भारत के **1.2 करोड़ हेक्टेयर** घास के मैदान राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में समुदायों की आजीविका में मदद करते हैं, फिर भी अधिकांश **NDC** इन्हें शामिल नहीं करते।
UN IYRP 2026 जलवायु NDC में घास के मैदानों की उपेक्षा पर कैसे ध्यान दिलाता है?
**UN IYRP 2026** राष्ट्रों से **जलवायु कार्य योजनाओं में घास के मैदानों के संरक्षण** को शामिल करने और **चरवाहों के पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान** को मान्यता देने का आह्वान करता है। घास के मैदान पृथ्वी की भूमि सतह के **40%** हिस्से में फैले हैं, **90% कार्बन भूमिगत** संग्रहित करते हैं, वनों के बराबर **कार्बन-सिंक** हैं, फिर भी अधिकांश **NDC** इन्हें शामिल नहीं करते। भारत के **1.2 करोड़ हेक्टेयर** घास के मैदान 4 राज्यों में समुदायों की आजीविका में मदद करते हैं।