राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व ने 9 जून 2026 को बाघ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम उठाने की घोषणा की। रिजर्व प्रशासन ने बाघों की चौबीसों घंटे रियल-टाइम निगरानी के लिए जीएसएम कैमरे और उपग्रह कॉलर तैनात करने की योजना बनाई है।

जीएसएम कैमरे सेलुलर नेटवर्क के माध्यम से तस्वीरें और वीडियो डेटा प्रसारित करते हैं, जिससे वन अधिकारी बिना शारीरिक उपस्थिति के दूर बैठकर निरंतर निगरानी कर सकते हैं। इससे बाघों के प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और डेटा का अनवरत प्रवाह बना रहता है। उपग्रह कॉलर व्यक्तिगत बाघों पर लगाए जाते हैं, जो जीपीएस आधारित रियल-टाइम स्थान-निर्धारण की सुविधा देते हैं। इससे वन्यजीव प्रबंधकों को बाघों के विचरण पैटर्न, क्षेत्रीय व्यवहार और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलती है।

यह पहल वर्ष 2026 में उभरी दो गंभीर चुनौतियों की पृष्ठभूमि में आई है — मई 2026 में कैनाइन डिस्टेम्पर वायरस (CDV) की चेतावनी और रिजर्व में बाघों के बीच बढ़ते क्षेत्रीय संघर्ष। सीडीवी एक खतरनाक विषाणुजनित बीमारी है जो बड़ी बिल्लियों की आबादी के लिए गंभीर खतरा है। रियल-टाइम निगरानी तकनीक प्रभावित पशुओं की शीघ्र पहचान और अलगाव में सहायक हो सकती है।

रणथम्भौर भारत के प्रमुख बाघ अभयारण्यों में से एक है, जो बाघ परियोजना के तहत स्थापित किया गया था। भारत सरकार ने 1973 में बाघ परियोजना की शुरुआत की थी, जो देशभर में बाघों की घटती संख्या को पुनः बढ़ाने में अत्यंत सफल रही है। रणथम्भौर में उन्नत तकनीक की तैनाती देश के अन्य बाघ अभयारण्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।