राजस्थान के तीन जिलों करौली, धौलपुर और भरतपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व तथा बांध बरेठा इको-सेंसिटिव जोन के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। आंदोलनकारी अब बड़े जनआंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं और 13 जुलाई 2026 को मरधई में महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसमें तीनों जिलों के हजारों ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार ग्रामीणों की सहमति के बिना टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जिससे बड़ी संख्या में गांवों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। आंदोलन से जुड़े राजू नावर ने बताया कि प्रस्तावित विस्तार से करीब 120 गांव प्रभावित होंगे, जहां लगभग एक से डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं और इन गांवों में 36 समाजों के लोग रहते हैं, जिन्होंने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अब तक कई पंचायतें और महापंचायतें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी जमीन और गांव नहीं छोड़ेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि विस्तार से किसानों की कृषि भूमि, आजीविका और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा, क्योंकि खेती और पशुपालन उनकी आय का मुख्य स्रोत है और विस्थापन की स्थिति में हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उनकी मांग है कि यदि सरकार टाइगर संरक्षण के लिए कदम उठाना चाहती है तो केवल बांध बरेठा क्षेत्र को ही टाइगर रिजर्व या वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाए और आबादी वाले गांवों तथा कृषि क्षेत्रों को प्रस्तावित दायरे से बाहर रखा जाए।
नावर ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग ने क्षेत्र में केपी-3 नामक टाइगर छोड़ा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है, हालांकि वन विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
