सब्सिडी वाली खाद के वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए राजस्थान सरकार 25 जून से नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस खरीफ सीजन से राजसमंद और सिरोही जिलों में फार्मर रजिस्ट्री आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली शुरू की जा रही है। नई व्यवस्था में किसान अपनी फार्मर आईडी के जरिए घर बैठे या नजदीकी ई-मित्र केंद्र से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें एक डिजिटल टोकन मिलेगा, जिसकी वैधता 48 घंटे तक रहेगी और इसी टोकन के आधार पर किसान अधिकृत डीलर से सब्सिडी वाली खाद प्राप्त कर सकेंगे। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि सरकार खाद पर भारी सब्सिडी देती है, लेकिन कई बार खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि कार्यों में इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती हैं। नई प्रणाली से केवल वास्तविक किसानों को ही सब्सिडी वाली खाद मिल सकेगी और वितरण प्रक्रिया की निगरानी भी आसान होगी। प्रदेश में अब तक 86.66 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से खाद की उपलब्धता, स्टॉक प्रबंधन और वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा सरकारी अनुदान का लाभ सीधे पात्र किसानों तक पहुंचेगा। सफल होने पर इसे पूरे राजस्थान में लागू किया जा सकता है।
राजस्थान में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए फार्मर रजिस्ट्री आधारित उर्वरक वितरण लागू
राजस्थान 25 जून से राजसमंद और सिरोही जिलों में पायलट के तौर पर फार्मर रजिस्ट्री आधारित सब्सिडी वाली खाद वितरण प्रणाली शुरू कर रहा है, जिसमें किसान फार्मर आईडी से खाद बुक करेंगे और 48 घंटे वैध डिजिटल टोकन से अधिकृत डीलर से खाद लेंगे। इसका उद्देश्य कालाबाजारी रोकना और सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाना है।
मुख्य तथ्य
- राजसमंद और सिरोही जिलों में पायलट के तौर पर 25 जून 2026 से फार्मर रजिस्ट्री आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली शुरू होगी।
- इस व्यवस्था का उद्देश्य सब्सिडी वाली खाद के वितरण में पारदर्शिता लाना और कालाबाजारी, जमाखोरी व गैर-कृषि उपयोग रोकना है।
- किसान अपनी फार्मर आईडी से घर बैठे या नजदीकी ई-मित्र केंद्र से खाद की बुकिंग कर सकेंगे।
- बुकिंग पर 48 घंटे वैध डिजिटल टोकन मिलेगा, जिससे अधिकृत डीलर से खाद ली जा सकेगी।
- कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि इससे केवल वास्तविक किसानों को ही सब्सिडी वाली खाद मिलेगी।
- प्रदेश में अब तक 86.66 लाख किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है; सफल होने पर इसे पूरे राज्य में लागू किया जा सकता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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25 जून से शुरू राजस्थान की फार्मर रजिस्ट्री आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:\n1. इसे राजसमंद और सिरोही जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है।\n2. बुकिंग के बाद किसानों को मिलने वाले डिजिटल टोकन की वैधता 15 दिन है।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: यह प्रणाली 25 जून से राजसमंद और सिरोही जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही है। कथन 2 गलत है: बुकिंग के बाद मिलने वाले डिजिटल टोकन की वैधता 48 घंटे है, 15 दिन नहीं। अतः केवल कथन 1 सही है।
स्रोत: अमर उजाला
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फार्मर रजिस्ट्री आधारित उर्वरक वितरण प्रणाली कहां पायलट के तौर पर शुरू हो रही है?
यह राजस्थान के राजसमंद और सिरोही जिलों में 25 जून 2026 से, खरीफ सीजन के साथ पायलट के तौर पर शुरू हो रही है।
नई व्यवस्था में किसान सब्सिडी वाली खाद कैसे प्राप्त करेंगे?
किसान अपनी फार्मर आईडी से घर बैठे या नजदीकी ई-मित्र केंद्र से खाद बुक करेंगे, 48 घंटे वैध डिजिटल टोकन प्राप्त करेंगे और उसी टोकन से अधिकृत डीलर से खाद लेंगे।
यह प्रणाली क्यों शुरू की जा रही है?
सब्सिडी वाली खाद के वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी, जमाखोरी व गैर-कृषि उपयोग रोकने के लिए, ताकि सब्सिडी केवल वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
राजस्थान में कितने किसानों की फार्मर आईडी बन चुकी है?
प्रदेश में अब तक 86.66 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।
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