राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी
Aसीधा उत्तर
श्रम नीति मसौदे में 90% अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक बनाने का लक्ष्य रखा गया है; गिग श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रस्तावित है।
मुख्य तथ्य
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में सार्वजनिक परामर्श के लिए राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति का मसौदा जारी किया
भारत का अनौपचारिक कार्यबल कुल रोजगार का लगभग 90% (करीब 47 करोड़ कामगार) है
प्रमुख प्रस्तावों में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों सहित सभी कामगारों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा और AI-संचालित राष्ट्रीय रोजगार सेवा 2.0 शामिल हैं
क्षेत्र कौशल परिषदों से कौशल विकास को उद्योग की माँग से जोड़ना, राज्यों में पोर्टेबल लाभ
राजस्थान में खनन, निर्माण, वस्त्र और पर्यटन में अनौपचारिक क्षेत्र में लगभग 2.8 करोड़ कामगार हैं
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। नीति का उद्देश्य भारत के बड़े अनौपचारिक कार्यबल — कुल रोजगार का अनुमानित 90% (लगभग 47 करोड़ श्रमिक) — को औपचारिक दायरे में लाना और गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढांचा तैयार करना है।
प्रमुख प्रस्तावों में गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों सहित सभी श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, AI-संचालित राष्ट्रीय रोजगार सेवा 2.0, सेक्टर स्किल काउंसिल के ज़रिए उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकास और अलग-अलग राज्यों में भी साथ चलने वाले लाभ शामिल हैं। खनन, निर्माण, कपड़ा और पर्यटन में बड़ी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था वाले राजस्थान को औपचारिकीकरण से लाभ होगा। राज्य में अनौपचारिक क्षेत्र में लगभग 2.8 करोड़ श्रमिक हैं।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2023 आकस्मिक रोजगार। — दोनों अनौपचारिक एवं आकस्मिक श्रम, सामाजिक सुरक्षा अंतराल एवं रोज़गार औपचारिकीकरण को संबोधित करते हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: राष्ट्रीय श्रम एवं रोज़गार नीति के मसौदे 2025 के प्रमुख प्रस्तावों एवं गिग श्रमिकों तथा राजस्थान की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर निहितार्थों की आलोचनात्मक जाँच कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
श्रम मंत्रालय का अक्टूबर 2025 मसौदा भारत के लगभग 47 करोड़ अनौपचारिक कार्यबल के 90 प्रतिशत औपचारिकीकरण का लक्ष्य रखता है। प्रस्तावों में गिग एवं प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, एआई-संचालित राष्ट्रीय रोज़गार सेवा 2.0 एवं पोर्टेबल लाभ शामिल हैं, जिनसे राजस्थान के 2.8 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
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2025 में जारी राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति का मसौदा क्या है?
**राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति का मसौदा** अक्टूबर 2025 में सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया। यह **श्रम बाजार सुधार, रोजगार सृजन, श्रमिक कल्याण, कौशल विकास** और औद्योगिक संबंधों के लिए भारत के व्यापक ढांचे की रूपरेखा पेश करता है।
भारत की राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति के मसौदे के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
नीति का लक्ष्य **औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, रोजगार की गुणवत्ता में सुधार करना, गिग कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना, चार श्रम संहिताओं के तहत श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित करना** और कार्यबल के कौशल का भारत के आर्थिक परिवर्तन लक्ष्यों से मेल बिठाना है।
राष्ट्रीय श्रम और रोजगार नीति को सार्वजनिक परामर्श के लिए क्यों जारी किया गया?
नीति को **सार्वजनिक परामर्श** के लिए जारी किया गया ताकि श्रमिकों, नियोक्ताओं, ट्रेड यूनियनों, उद्योग निकायों और जनता से सुझाव लिए जा सकें और अंतिम नीति **समावेशी, व्यावहारिक और व्यापक रूप से स्वीकार्य** बन सके।
मसौदा श्रम नीति गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों के बारे में क्या प्रावधान करती है?
मसौदा नीति **गिग अर्थव्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों की तेज बढ़ोतरी** को स्वीकार करती है और पारंपरिक रोजगार ढांचे से बाहर आने वाले प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों तक **सामाजिक सुरक्षा का दायरा, कल्याण लाभ और शिकायत तंत्र** बढ़ाने का प्रस्ताव करती है।
राष्ट्रीय श्रम नीति और भारत की चार श्रम संहिताओं के बीच क्या संबंध है?
भारत ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को **चार श्रम संहिताओं** में एकीकृत किया। राष्ट्रीय श्रम नीति इन संहिताओं के कार्यान्वयन को दिशा देने के लिए **समग्र ढांचा और नीतिगत मंशा** स्पष्ट करती है।
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