WTO का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14): भारत ने खाद्य सुरक्षा और मत्स्य सब्सिडी पर प्रस्ताव प्रस्तुत किए
Aसीधा उत्तर
भारत ने MC14 के लिए खाद्य भंडारण के स्थायी समाधान और पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा से जुड़े प्रस्ताव प्रस्तुत किए; WTO का MC14 कैमरून में 26 से 29 मार्च 2026 तक होगा।
मुख्य तथ्य
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन 26 से 29 मार्च 2026 तक कैमरून के याउंडे में होगा।
भारत के प्रस्ताव खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के स्थायी समाधान और मत्स्य सब्सिडी वार्ता में पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा पर केंद्रित हैं।
सार्वजनिक भंडारण के प्रस्ताव में स्थायी शांति उपबंध की मांग की गई है, ताकि विकासशील देश छोटे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न खरीद सकें और इस व्यवस्था को WTO में चुनौती न दी जा सके।
मत्स्य सब्सिडी वार्ता में भारत ऐसे मछुआरों के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार की वकालत करता है जो पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ते हैं या जिनकी आजीविका इसी पर निर्भर है।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के लिए अपने प्रस्ताव आधिकारिक रूप से सौंपे। यह सम्मेलन 26 से 29 मार्च 2026 तक कैमरून के याउंडे में होगा। भारत के प्रस्ताव खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के स्थायी समाधान और मत्स्य सब्सिडी वार्ता में पारंपरिक मछुआरों की आजीविका की रक्षा पर केंद्रित हैं।
सार्वजनिक भंडारण से जुड़े भारत के प्रस्ताव में स्थायी शांति उपबंध की मांग की गई है, ताकि विकासशील देश छोटे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीद सकें और इस व्यवस्था को WTO में चुनौती न दी जा सके। मत्स्य सब्सिडी के मुद्दे पर भारत ऐसे मछुआरों के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार की वकालत करता है जो पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ते हैं या जिनकी आजीविका इसी पर निर्भर है।
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पूना पैक्ट (1932) महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के बीच किसके संबंध में समझौता था:
व्याख्या · सही उत्तर C
पूना समझौते (1932) ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडलों की व्यवस्था हटाकर सामान्य निर्वाचक मंडलों में आरक्षित सीटों का प्रावधान किया।
सत्यापित
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के लिए कौन-से प्रस्ताव प्रस्तुत किए और यह कहाँ होगा?
भारत ने **विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14)** के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह सम्मेलन **याउंडे, कैमरून** में **26 से 29 मार्च 2026** तक होगा। भारत के दो प्रमुख प्रस्ताव हैं: (1) खाद्य सुरक्षा के लिए **सार्वजनिक भंडारण का स्थायी समाधान**, और (2) मत्स्य सब्सिडी वार्ता में **पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा**।
WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) में सार्वजनिक भंडारण को लेकर भारत का प्रस्ताव क्या है?
WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) में भारत के **सार्वजनिक भंडारण प्रस्ताव** में **स्थायी शांति उपबंध** की मांग की गई है। इससे विकासशील देशों का छोटे किसानों से **न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)** पर अनाज खरीदने का अधिकार सुरक्षित रहेगा और इस व्यवस्था को WTO में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। मौजूदा शांति उपबंध अस्थायी है; भारत अपने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों की रक्षा के लिए इसे स्थायी बनाना चाहता है।
याउंडे, कैमरून में होने वाले WTO के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) में मत्स्य सब्सिडी पर भारत का रुख क्या है?
**WTO का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14)** **याउंडे, कैमरून** में **26 से 29 मार्च 2026** तक होगा। मत्स्य सब्सिडी वार्ता में भारत ऐसे मछुआरों के लिए **विशेष और विभेदक व्यवहार** की वकालत करता है जो पारंपरिक तरीके से मछली पकड़ते हैं या जिनकी आजीविका इसी पर निर्भर है। भारत का कहना है कि विकासशील देशों के छोटे पारंपरिक मछुआरों पर वे सब्सिडी नियम लागू नहीं होने चाहिए, जो मछली पकड़ने वाले बड़े व्यावसायिक बेड़ों पर लागू होते हैं।
WTO का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) क्या है और यह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
**MC14 विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन** है, जो **याउंडे, कैमरून** में **26 से 29 मार्च 2026** तक होगा। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने **खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण** के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीदने की व्यवस्था को सुरक्षित रखने और **मत्स्य सब्सिडी** वार्ता में पारंपरिक मछुआरों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं।
भारत WTO में सार्वजनिक भंडारण के लिए स्थायी शांति उपबंध क्यों चाहता है?
भारत **सार्वजनिक भंडारण** के लिए **स्थायी शांति उपबंध** इसलिए चाहता है क्योंकि उसके खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत किसानों से **न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)** पर अनाज खरीदा जाता है। विकसित देशों का तर्क है कि WTO के नियमों के अनुसार यह व्यापार को विकृत करने वाली सब्सिडी है। देश में लंबे समय तक खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए मौजूदा अस्थायी शांति उपबंध पर्याप्त नहीं है, खासकर इसलिए कि देश के **1.4 अरब लोग** सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर हैं।
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