वन्यजीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने सितंबर 2025 की शुरुआत में राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ क्षेत्र में दुर्लभ एशियाई कैरेकल शावक की मौजूदगी की पुष्टि की। तस्वीरों से पुष्टि होने के बाद अधिकारियों ने आबादी का व्यवस्थित सर्वेक्षण शुरू किया और सीमावर्ती क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी। भारत में कैरेकल की कुल आबादी 50 से भी कम है और ये मुख्यतः राजस्थान तथा गुजरात के शुष्क घास के मैदानों में पाए जाते हैं।

कैरेकल (Caracal caracal) वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध है, इसलिए इसे भारत में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। शावक का मिलना प्रजनन गतिविधि का संकेत देता है और आबादी फिर बढ़ने की उम्मीद जगाता है। वन अधिकारियों ने जैसलमेर में निगरानी बढ़ाने और सामुदायिक संरक्षण उपाय अपनाने की घोषणा की।