प्रकाशित: 2 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और 12 राज्यों को नोटिस जारी किया
2 फरवरी 2026 को भारत के उच्चतम न्यायालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) की जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और 12 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए। इस याचिका में राज्य-स्तरीय धर्मांतरण-विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इन 12 राज्यों में ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।
NCCI ने तर्क दिया कि ये कानून स्वैच्छिक धर्मांतरण को अपराध बनाते हैं, अल्पसंख्यकों के खिलाफ स्वयंभू समूहों की हिंसा को बढ़ावा देते हैं और उचित प्रक्रिया के बिना गिरफ्तारी की अनुमति देते हैं। तीन न्यायाधीशों की पीठ केंद्र और राज्यों से चार सप्ताह में जवाब मिलने के बाद सभी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। यह मामला राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 29 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ।
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प्रश्न: धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर सर्वोच्च न्यायालय के नोटिसों से उठे संवैधानिक मुद्दों तथा धार्मिक स्वतंत्रता पर इनके प्रभाव की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
2 फरवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेस इंडिया की याचिका पर केंद्र तथा राजस्थान सहित बारह राज्यों को नोटिस जारी किए। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये कानून स्वैच्छिक धर्मांतरण को अपराध बनाते हैं, अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा बढ़ाते हैं तथा प्रक्रिया का उल्लंघन करते हैं; अनुच्छेद 25 की स्वतंत्रता पर चिंता उठती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2 फरवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के संबंध में क्या किया?
**2 फरवरी 2026** को **भारत के उच्चतम न्यायालय** ने **नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI)** की जनहित याचिका पर **केंद्र सरकार और 12 राज्य सरकारों** को नोटिस जारी किए। इस याचिका में राज्य-स्तरीय धर्मांतरण-विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
NCCI की जनहित याचिका में किन 12 राज्यों के धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को चुनौती दी गई?
जनहित याचिका में चुनौती दिए गए **12 राज्य** हैं: **ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान**।
NCCI ने उच्चतम न्यायालय में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के खिलाफ क्या तर्क दिए?
**NCCI** ने तर्क दिया कि राज्य के धर्मांतरण-विरोधी कानून **स्वैच्छिक धर्मांतरण को अपराध बनाते हैं**, अल्पसंख्यकों के खिलाफ **स्वयंभू समूहों की हिंसा को बढ़ावा देते हैं** और **उचित प्रक्रिया के बिना गिरफ्तारी** की अनुमति देते हैं। NCCI का कहना है कि ये कानून संविधान के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
राजस्थान का कौन-सा धर्मांतरण-विरोधी कानून इस मामले में प्रासंगिक है?
**राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025** **29 अक्टूबर 2025** से लागू हुआ। यह इस मामले में प्रासंगिक है क्योंकि **राजस्थान** जनहित याचिका में नामित 12 राज्यों में से एक है।
उच्चतम न्यायालय में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों पर सुनवाई का अगला कदम क्या है?
**तीन न्यायाधीशों की पीठ** केंद्र और सभी 12 राज्यों के **चार सप्ताह** में जवाब दाखिल करने के बाद सभी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। यह मामला तय करेगा कि राज्यों के धर्मांतरण-विरोधी कानून अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 के तहत संवैधानिक हैं या नहीं।