सोनम वांगचुक 6 महीने बाद जोधपुर जेल से रिहा; NSA हिरासत रद्द
Aसीधा उत्तर
सोनम वांगचुक 6 महीने बाद जोधपुर जेल से रिहा; NSA रद्द; लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग जारी।
मुख्य तथ्य
गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (59) की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत रद्द कर दी और करीब 6 महीने बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा कर दिया।
वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए उन विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिनमें राज्य का दर्जा देने या जनजातीय समुदायों को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने की मांग की जा रही थी।
‘लद्दाख के आइस मैन’ के नाम से प्रसिद्ध वांगचुक, 2019 में जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किए जाने के बाद लद्दाख की स्वायत्तता की मांग वाले आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने।
समर्थकों ने 22 मार्च को उनकी लेह वापसी पर जश्न मनाने की योजना बनाई।
लद्दाख के नेताओं ने दोहराया कि छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांगों पर समझौता नहीं होगा।
गृह मंत्रालय ने 14 मार्च 2026 को लद्दाख के प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (59) की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत रद्द कर दी और करीब 6 महीने बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा कर दिया। वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए उन विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिनमें राज्य का दर्जा देने या जनजातीय समुदायों को छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने की मांग की जा रही थी।
वांगचुक पर्यावरण संरक्षण के समर्थक और नवाचारक हैं। उन्हें आइस स्तूप नामक कृत्रिम हिमनद के नवाचार के लिए जाना जाता है। 2019 में जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किए जाने के बाद लद्दाख से राज्य का दर्जा छिन गया और वांगचुक वहां स्वायत्तता की मांग वाले आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने। समर्थकों ने 22 मार्च को उनकी लेह वापसी पर जश्न मनाने की योजना बनाई। लद्दाख के नेताओं ने दोहराया कि छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांगों पर समझौता नहीं होगा।
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सोनम वांगचुक को मार्च 2026 में जोधपुर जेल से राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत से क्यों रिहा किया गया?
**गृह मंत्रालय** ने **14 मार्च 2026** को **सोनम वांगचुक** की **राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम** के तहत हिरासत रद्द कर दी और करीब **6 महीने** बाद उन्हें **जोधपुर जेल** से तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। वांगचुक को **सितंबर 2025** में लद्दाख में **राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत संरक्षण** देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हिरासत में लिया गया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम क्या है और इसे सोनम वांगचुक पर क्यों लगाया गया था?
**राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम** राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से किसी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना अधिकतम 12 महीने तक निवारक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। **सोनम वांगचुक** (59) को **सितंबर 2025** में लद्दाख में जनजातीय समुदायों के लिए **राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत संरक्षण** देने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था। यह हिरासत **14 मार्च 2026** को रद्द कर दी गई।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए जाने से पहले सोनम वांगचुक लद्दाख में किस मांग को लेकर विरोध कर रहे थे?
**सोनम वांगचुक** ने **लद्दाख** में जनजातीय समुदायों के लिए **राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत संरक्षण** देने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया। इन प्रदर्शनों में **4 लोगों की मौत** के बाद उन्हें **सितंबर 2025** में गिरफ्तार किया गया और **14 मार्च 2026** तक करीब **6 महीने** के लिए **राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम** के तहत **जोधपुर जेल** में रखा गया।
छठी अनुसूची क्या है और सोनम वांगचुक जैसे लद्दाख के कार्यकर्ताओं ने इसकी मांग क्यों की?
भारतीय संविधान की **छठी अनुसूची** जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों की व्यवस्था करती है और मूल निवासी समुदायों के भूमि तथा सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करती है। **सोनम वांगचुक** और लद्दाख के कार्यकर्ताओं ने 2019 में इस क्षेत्र के केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख की जनजातीय पहचान की रक्षा के लिए **राज्य का दर्जा या छठी अनुसूची के तहत संरक्षण** देने की मांग की।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द होने से पहले उन्हें जोधपुर जेल में कितने समय तक रखा गया था?
**सोनम वांगचुक** (59) को करीब **6 महीने**, यानी **सितंबर 2025 से 14 मार्च 2026** तक, **जोधपुर जेल** में रखा गया। **गृह मंत्रालय** ने **राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम** के तहत उनकी हिरासत रद्द कर दी और तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
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