राजस्थान पुलिस ने गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से 21 अक्टूबर 2025 को जयपुर में ICAT (इंटीग्रेटेड साइबर अवेयरनेस एंड ट्रैकिंग) साइबर अपराध ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर का पायलट कार्यक्रम शुरू किया। यह सॉफ्टवेयर रियल टाइम में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की पहचान करने, उन्हें ब्लॉक करने और ट्रैक करने के लिए बनाया गया है।

ICAT प्लेटफ़ॉर्म टेलीकॉम प्रदाताओं, वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन डेटाबेस के डेटा को जोड़कर साइबर अपराध गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध उपकरणों, SIM कार्डों और बैंक खातों को चिह्नित करता है। उपकरण या खाता चिह्नित होने के बाद अधिकारी दूर से उपकरणों को ब्लॉक कर सकते हैं और जुड़े वित्तीय खातों को फ्रीज कर सकते हैं, जिससे आगे होने वाले धोखाधड़ी वाले लेनदेन रोके जा सकें।

लॉन्च के दौरान एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि मेवात क्षेत्र — जो राजस्थान के भरतपुर जिले और हरियाणा के नूह जिले के कुछ हिस्सों में फैला है — देश में साइबर अपराध गतिविधियों की सबसे अधिक सघनता वाला क्षेत्र है। 'मेवात साइबर माफिया' के नाम से जाने जाने वाले मेवात स्थित साइबर गिरोह SIM कार्ड फार्मिंग, स्पूफ्ड फोन नंबरों और बल्क WhatsApp धोखाधड़ी अभियानों का उपयोग करके पूरे भारत में पीड़ितों को निशाना बनाते हैं।

यह ICAT सॉफ्टवेयर पायलट राजस्थान के व्यापक डिजिटल सुरक्षा मिशन का हिस्सा है, जिसमें स्कूलों और कॉलेजों में साइबर जागरूकता अभियान, हेल्पलाइन 1930 का प्रचार और सभी जिलों में समर्पित साइबर पुलिस स्टेशनों की स्थापना शामिल है।