26 दिसंबर 2025 को IIT पटना, बिहार में परम रुद्र सुपरकंप्यूटर का अनावरण किया गया। यह बिहार में परम रुद्र की पहली स्थापना है और इसे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत विकसित किया गया है। इस पहल का महत्व केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, क्योंकि सुपरकंप्यूटिंग अब जलवायु मॉडलिंग, सामग्री विज्ञान, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, दवा खोज, डेटा, AI और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में शोध की बुनियादी जरूरत बन चुकी है।

IIT पटना के आर्यभट्ट सुपरकंप्यूटिंग सेंटर में स्थापित परम रुद्र की पीक क्षमता 838 टेराफ्लॉप्स बताई गई है। इसमें 180 कंप्यूट नोड, 1 पीबी उच्च-प्रदर्शन स्टोरेज और एनविडिया A100 जीपीयू जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इससे 10 विभागों के लगभग 60 शिक्षकों और 400 छात्रों को लाभ मिलने की बात कही गई है। मौजूदा उपयोग-क्षेत्रों में खगोलजीव विज्ञान, सामग्री डिजाइन, क्वांटम कंप्यूटिंग, AI, डेटा विज्ञान, जलवायु मॉडलिंग, दवा खोज, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी और क्रिप्टोग्राफी शामिल हैं।

परीक्षा में परम रुद्र को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल सार्वजनिक शोध अवसंरचना और स्वदेशी तकनीकी क्षमता के ताजा उदाहरण के रूप में पढ़ा जा सकता है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय संयुक्त रूप से संचालित करते हैं, जबकि इसका कार्यान्वयन सी-डैक, पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु से जुड़ा है। इसलिए प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, मिशन, क्षमता और उपयोग-क्षेत्र पूछे जा सकते हैं। स्टैटिक जीके के लिए सुपरकंप्यूटर, टेराफ्लॉप्स, कंप्यूट नोड, जीपीयू, उच्च-प्रदर्शन स्टोरेज और मिशन-कार्यान्वयन जैसी बुनियादी शब्दावली भी साथ में दोहराई जानी चाहिए। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, शोध अवसंरचना, क्षेत्रीय वैज्ञानिक क्षमता और भारत में स्वदेशी तकनीक निर्माण पर उत्तर को ठोस बना सकता है।