पितृ पक्ष 2025, पूर्वजों के सम्मान के लिए समर्पित 16 दिनों की हिंदू धार्मिक अवधि, 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण के साथ शुरू हुई। इस दौरान हिंदू अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं। हिंदू परंपरा में चंद्र ग्रहण के साथ पड़ने पर इस अवधि का महत्व और बढ़ जाता है। वाराणसी, गया और हरिद्वार जैसे पवित्र नगरों में तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ी, जिन्होंने पवित्र नदियों के किनारे पितृ-कर्म किए। पितृ पक्ष महालया अमावस्या पर समाप्त होता है और इसके बाद शरद नवरात्रि के साथ त्योहारों का दौर शुरू होता है। पर्यटन मंत्रालय और राज्य सरकारों ने प्रमुख धार्मिक केंद्रों पर तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराईं।
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण के साथ
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के साथ हुई; वाराणसी, गया और हरिद्वार में तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ी।
मुख्य तथ्य
- पितृ पक्ष 2025, यानी पूर्वजों के सम्मान के लिए समर्पित 16 दिनों की हिंदू धार्मिक अवधि, 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण के साथ शुरू हुई।
- हिंदू इस अवधि में दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
- हिंदू परंपरा में चंद्र ग्रहण के साथ पड़ने पर इस अवधि का विशेष महत्व माना जाता है।
- वाराणसी, गया और हरिद्वार जैसे पवित्र नगरों में पितृ-कर्म करने आए तीर्थयात्रियों की भीड़ उमड़ी।
- पितृ पक्ष महालया अमावस्या पर समाप्त होता है और इसके बाद शरद नवरात्रि के साथ त्योहारों का दौर शुरू होता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का वर्णन 2025 में इसके पालन के संदर्भ में कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
पितृ पक्ष पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध और तर्पण करने की 16 दिनों की अवधि है। इसकी शुरुआत 7 सितंबर 2025 को पूर्ण चंद्र ग्रहण के साथ हुई, जिसे विशेष रूप से शुभ माना गया। वाराणसी, गया और हरिद्वार में तीर्थयात्रियों ने पवित्र नदियों के किनारे पितृ-कर्म किए। यह महालया अमावस्या पर समाप्त होकर शरद नवरात्रि के उत्सवों से जुड़ता है।
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पितृ पक्ष 2025 किस अनुष्ठान के साथ समाप्त होता है, जिसे उत्सव काल की शुरुआत माना जाता है?
पितृ पक्ष महालय अमावस्या के साथ समाप्त होता है, जो शरद नवरात्रि और उत्सव काल की शुरुआत का प्रतीक है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पितृ पक्ष 2025 कब शुरू हुआ और उसी दिन कौन-सी खास खगोलीय घटना हुई?
**पितृ पक्ष 2025** की शुरुआत **7 सितंबर** को **पूर्ण चंद्र ग्रहण** के साथ हुई। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना थी। हिंदू परंपरा में इस संयोग का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि पितृ पक्ष पहले से ही पूर्वजों से जुड़े कर्मों के लिए समर्पित है।
पितृ पक्ष क्या है और इसके दौरान कौन से कर्म किए जाते हैं?
**पितृ पक्ष**, जिसे **श्राद्ध पक्ष या महालया पक्ष** भी कहा जाता है, चंद्र पंचांग के **भाद्रपद मास** में आने वाली 16 दिनों की अवधि है। इसमें हिंदू दिवंगत पूर्वजों के सम्मान और उनकी शांति के लिए **श्राद्ध कर्म** करते हैं। इनमें तर्पण के रूप में जल और पिंड दान के रूप में चावल के पिंड अर्पित किए जाते हैं।
पितृ पक्ष के साथ पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ने का खगोलीय महत्व क्या है?
**पितृ पक्ष** के दौरान **पूर्ण चंद्र ग्रहण** को हिंदू परंपरा में पितृ-कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। चंद्र ग्रहण तब लगता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है। 2025 का ग्रहण **2018 के बाद पूरे भारत में दिखाई देने वाला पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण** था।
पितृ पक्ष के दौरान कौन से श्राद्ध कर्म किए जाते हैं और उनका क्या महत्व है?
**श्राद्ध कर्मों** में **तर्पण** के दौरान पूर्वजों को तिल मिला जल अर्पित किया जाता है, **पिंड दान** में गया और इलाहाबाद जैसे पवित्र स्थानों पर चावल के पिंड चढ़ाए जाते हैं, **ब्राह्मणों को भोजन** कराया जाता है और **दान** दिया जाता है। ये कर्म उस तिथि पर किए जाते हैं, जो पूर्वज की मृत्यु-तिथि से मेल खाती है।
भारतीय समाज में पितृ पक्ष का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
**पितृ पक्ष** भारत में **पितृ पूजा**, यानी पूर्वजों के प्रति श्रद्धा की परंपरा का प्रतीक है। यह बड़ों और दिवंगत आत्माओं के सम्मान का भाव दिखाता है। इसे अलग-अलग हिंदू समुदायों में मनाया जाता है और यह दुनिया की दूसरी संस्कृतियों में पूर्वजों को याद करने की मिलती-जुलती परंपराओं से भी मेल खाता है। भारतीय समाज की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को समझने में इसका महत्व है।
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