प्रकाशित: 7 दिसंबर 2025टॉपिक
UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वाँ सत्र; भारत की विरासत पर ध्यान
UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति का 20वाँ सत्र दिसंबर 2025 की शुरुआत में आयोजित हुआ। भारत के 15 तत्व UNESCO की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित हैं, जिनमें योग, कुंभ मेला, रामलीला, छऊ नृत्य और कूडियाट्टम शामिल हैं।
भारत की विविध अमूर्त विरासत में प्रदर्शन कलाएँ, मौखिक परंपराएँ, अनुष्ठान, उत्सव, पारंपरिक शिल्पकला और प्रकृति संबंधी ज्ञान शामिल हैं। राजस्थान का कालबेलिया लोक नृत्य 2010 में अंकित किया गया। राज्य की समृद्ध अमूर्त विरासत में फड़ चित्रकला, मांगणियार और लंगा संगीत तथा भाट समुदाय की कठपुतली परंपराएँ भी शामिल हैं।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
सितंबर 2025 में जोड़े जाने के बाद UNESCO की अस्थायी सूची में भारत के कुल स्थलों की संख्या कितनी हुई?
व्याख्या · सही उत्तर Cभारत की अस्थायी सूची 62 से बढ़कर 69 हो गई, जिसमें 49 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक और 3 मिश्रित संपत्तियाँ शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वाँ सत्र कब आयोजित हुआ और उसकी प्रतिनिधि सूची में भारत के कितने तत्व हैं?
UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति का 20वाँ सत्र दिसंबर 2025 की शुरुआत में आयोजित हुआ। UNESCO की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में भारत के 15 तत्व अंकित हैं, जिनमें योग, कुंभ मेला, रामलीला, छऊ नृत्य और कूडियाट्टम शामिल हैं।
UNESCO की प्रतिनिधि सूची में शामिल भारतीय तत्वों के प्रमुख उदाहरण कौन-से हैं?
UNESCO की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में भारत के 15 तत्व हैं, जिनमें योग, कुंभ मेला, रामलीला, छऊ नृत्य और कूडियाट्टम शामिल हैं।
भारत की विविध परंपराओं में अमूर्त विरासत के किन रूपों को प्रमुखता दी गई है?
भारत की अमूर्त विरासत में प्रदर्शन कलाएँ, मौखिक परंपराएँ, अनुष्ठान, उत्सव, पारंपरिक शिल्पकला और प्रकृति संबंधी ज्ञान शामिल हैं।
UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वाँ सत्र कब आयोजित हुआ?
UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत समिति का 20वाँ सत्र दिसंबर 2025 की शुरुआत में आयोजित हुआ।
राजस्थान की किन अमूर्त विरासत परंपराओं को प्रमुखता दी गई है?
राजस्थान की समृद्ध अमूर्त विरासत में कालबेलिया लोक नृत्य, फड़ चित्रकला, मांगणियार और लंगा संगीत तथा भाट समुदाय की कठपुतली परंपरा शामिल है। कालबेलिया लोक नृत्य 2010 में अंकित किया गया।