UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए अंतर-सरकारी समिति ने दीपावली (दिवाली) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया है। हाल के वर्षों में यह भारत की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उपलब्धियों में से एक है।

दीपावली — प्रकाश का त्योहार — पूरे भारत में और दुनियाभर के भारतीय प्रवासी समुदायों में मनाई जाती है, आमतौर पर हिंदू महीने कार्तिक की अमावस्या की रात को। कई परंपराओं में इसका धार्मिक महत्व है: हिंदुओं के लिए, यह भगवान राम की अयोध्या वापसी से जुड़ी है; सिखों के लिए, गुरु हरगोबिंद जी की कारावास से मुक्ति (बंदी छोड़ दिवस) से; जैनों के लिए, महावीर की मोक्ष प्राप्ति से; और कुछ बौद्धों के लिए, सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म में धर्मांतरण से।

UNESCO का ICH कन्वेंशन (2003) जीवित विरासत — परंपराओं, प्रदर्शन कलाओं, सामाजिक प्रथाओं, अनुष्ठानों और उत्सव कार्यक्रमों — की सुरक्षा करता है, जिन्हें समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं। भारत 2005 से हस्ताक्षरकर्ता है।

राजस्थान की दीपावली परंपराओं में अनूठे आयाम हैं: पुष्कर के उत्सव प्रसिद्ध पुष्कर ऊँट मेले (कार्तिक पूर्णिमा) के साथ मेल खाते हैं; जोधपुर की नीली नगरी की रोशनी प्रसिद्ध है; और राजस्थानी कारीगर परंपराएं — तेल के दीपक, रंगोली, बीकानेर की आतिशबाजी — ICH से जुड़ी विरासत का हिस्सा हैं।