बीकानेर में बिश्नोई समाज के 11 दिनों के निरंतर जन आंदोलन — खेजड़ी बचाओ आंदोलन — के बाद राजस्थान सरकार ने फरवरी 2026 में खेजड़ी पेड़ों (Prosopis cineraria) की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध घोषित किया। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को खेजड़ी पेड़ों की कटाई सख्ती से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया और समुदाय को आश्वस्त किया कि राजस्थान विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में एक व्यापक वृक्ष संरक्षण कानून पेश किया जाएगा।

यह आंदोलन पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए खेजड़ी पेड़ों की कटाई से शुरू हुआ। एक अध्ययन के अनुसार, पिछले 14 वर्षों में बीकानेर जिले में लगभग पांच लाख पेड़ काटे गए। अपने चरम पर इस विरोध में लगभग एक लाख नागरिक शामिल हुए।

खेजड़ी (Prosopis cineraria), जिसे 'रेगिस्तान का कल्पवृक्ष' कहा जाता है, राजस्थान का राज्य वृक्ष है। यह बिश्नोई समुदाय के लिए सांस्कृतिक रूप से पवित्र है। 1730 के खेजड़ली नरसंहार में 363 लोगों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए — यह वृक्ष संरक्षण बलिदान का विश्व का पहला दर्ज उदाहरण है और भारत के चिपको आंदोलन की प्रेरणा है।