राजस्थान सरकार ने बिश्नोई समुदाय के 11 दिवसीय आंदोलन के बाद खेजड़ी वृक्ष (Prosopis cineraria) — राजस्थान का राजकीय वृक्ष — की कटाई पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया। राजस्व विभाग ने 12 फरवरी से 26 फरवरी 2026 के बीच सभी जिला कलेक्टरों को आधिकारिक आदेश जारी किया कि बिना पूर्व स्वीकृति के राज्य में कोई भी खेजड़ी वृक्ष न काटा जाए.
यह आंदोलन पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि साफ करने के लिए खेजड़ी वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई की खबरों से शुरू हुआ। बिश्नोई समुदाय, जो ऐतिहासिक रूप से खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए जाना जाता है — यह परंपरा 1730 के खेजड़ली नरसंहार से जुड़ी है, जहां 363 बिश्नोइयों ने वृक्षों की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किए — ने जोधपुर और अन्य जिलों में विरोध प्रदर्शन किए।
समुदाय की मांगों पर सरकार ने तत्काल प्रतिबंध जारी किया और आने वाले बजट सत्र में वृक्ष संरक्षण के लिए अलग कानून लाने का वादा किया। यह राजस्थान में पवित्र वृक्षों की सुरक्षा के लिए पहला स्वतंत्र कानून होगा।
खेजड़ी (Prosopis cineraria) शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है — यह मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करती है, चारा और ईंधन की लकड़ी प्रदान करती है और मरुस्थल के प्रसार के विरुद्ध वायुरोधक का काम करती है। बिश्नोई समुदाय के इस आंदोलन की तुलना 1970 के दशक के चिपको आंदोलन से की जाती है।
