भारतीय सेना ने घोषणा की कि 78वीं सेना दिवस परेड (15 जनवरी 2026) जयपुर, राजस्थान में आयोजित होगी — इतिहास में पहली बार परेड किसी सेना छावनी के बाहर और किसी शहर के बीचोंबीच आयोजित की गई। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस घोषणा का स्वागत किया। परेड मार्ग अक्षयपात्र सर्किल से बम्बई हॉस्पिटल, माहल रोड, जयपुर तक था। इस कार्यक्रम में एक लाख से अधिक दर्शक शामिल हुए और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, टी-90 भीष्म टैंक, स्वदेशी अर्जुन मेन बैटल टैंक और 30 से अधिक मार्च-पास्ट एवं उपकरण इकाइयाँ प्रदर्शित की गईं। पहली बार, दो विशेष टुकड़ियों — RAJRIF और SIKH LI की भैरव बटालियन — ने मार्च-पास्ट में भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में राजस्थान के कालबेलिया और गैर लोकनृत्य शामिल थे। 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी 8-12 जनवरी तक सीकर रोड पर भवानी निकेतन कॉलेज में आयोजित की गई। सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है, क्योंकि 1949 में इसी दिन फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।
78वीं सेना दिवस परेड पहली बार जयपुर में छावनी के बाहर: माहल रोड पर ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारतीय सेना ने घोषणा की कि 78वीं सेना दिवस परेड (15 जनवरी 2026) जयपुर, राजस्थान में आयोजित होगी। यह इतिहास में पहली बार था जब परेड किसी सेना छावनी के बाहर और किसी शहर के केंद्र में आयोजित की गई। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस घोषणा का स्वागत किया। परेड मार्ग अक्षयपात्र सर्किल से बम्बई हॉस्पिटल, माहल रोड, जयपुर तक था। इस कार्यक्रम में एक लाख से अधिक दर्शक शामिल हुए और ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, टी-90 भीष्म टैंक, स्वदेशी अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक और 30 से अधिक मार्च-पास्ट एवं उपकरण इकाइयाँ प्रदर्शित की गईं। पहली बार, दो विशेष टुकड़ियों — RAJRIF और SIKH LI की भैरव बटालियन — ने मार्च-पास्ट में भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में राजस्थान के कालबेलिया और गैर लोकनृत्य शामिल थे। 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी 8-12 जनवरी तक सीकर रोड पर भवानी निकेतन कॉलेज में आयोजित की गई। सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है, जब 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।
मुख्य तथ्य
- 78वीं सेना दिवस परेड 15 जनवरी 2026 को पहली बार छावनी के बाहर जयपुर में आयोजित हुई।
- परेड मार्ग अक्षयपात्र सर्किल से बॉम्बे हॉस्पिटल, महल रोड, जयपुर तक था।
- ब्रह्मोस मिसाइल, T-90 भीष्म टैंक और अर्जुन MBT का प्रदर्शन किया गया।
- भैरव बटालियन (RAJRIF और SIKH LI) ने पहली बार मार्च-पास्ट में भाग लिया।
- सेना दिवस 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा की कमान संभालने की स्मृति में मनाया जाता है।
- एक लाख से अधिक दर्शकों ने कालबेलिया और गैर लोकनृत्य सहित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को देखा।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 78वीं सेना दिवस परेड पहली बार छावनी के बाहर जयपुर में आयोजित होने का क्या महत्व है?
उत्तर (50 शब्द):
जयपुर के माहल रोड पर 78वीं सेना दिवस परेड पहली बार छावनी से बाहर आयोजित हुई, जिसमें एक लाख से अधिक दर्शक आए। ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र, टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक तथा कालबेलिया एवं गैर लोक नृत्य प्रदर्शित हुए, जो राजस्थान की सैन्य विरासत से सेना के जुड़ाव और नागरिक-सैन्य संबंधों का प्रतीक है।
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सेना दिवस 1949 के उस दिन की स्मृति में मनाया जाता है जब किस अधिकारी ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी?
लेख के अनुसार, सेना दिवस 1949 के उस दिन की स्मृति में मनाया जाता है जब फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा ने ब्रिटिश जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
78वीं सेना दिवस परेड का जयपुर में आयोजन ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण क्यों था?
15 जनवरी 2026 को आयोजित 78वीं सेना दिवस परेड इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि भारतीय इतिहास में पहली बार सेना दिवस परेड किसी सेना छावनी के बाहर आयोजित हुई — यह जयपुर, राजस्थान की माहल रोड पर शहर के केंद्र में हुई।
जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड का मार्ग क्या था?
परेड का मार्ग अक्षयपात्र सर्किल से बॉम्बे हॉस्पिटल, माहल रोड, जयपुर तक था। एक लाख से अधिक दर्शक इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिसमें कालबेलिया और गैर लोकनृत्य भी प्रस्तुत किए गए।
78वीं सेना दिवस परेड में कौन से हथियार और सैन्य उपकरण प्रदर्शित हुए?
जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, T-90 भीष्म बैटल टैंक और स्वदेशी अर्जुन मेन बैटल टैंक का प्रदर्शन हुआ। परेड में 30 से अधिक मार्च-पास्ट टुकड़ियाँ और सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन शामिल था।
भारत में सेना दिवस (15 जनवरी) का क्या महत्व है?
सेना दिवस प्रतिवर्ष 15 जनवरी को 15 जनवरी 1949 की स्मृति में मनाया जाता है — इसी दिन फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। यह स्वतंत्रता के बाद सेना के भारतीयकरण का प्रतीक है।
जयपुर की सेना दिवस परेड में पहली बार किन सैन्य इकाइयों ने मार्च-पास्ट में भाग लिया?
राजपूताना राइफल्स (RAJRIF) और सिख लाइट इन्फैंट्री (SIKH LI) की भैरव बटालियन ने जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड के मार्च-पास्ट में पहली बार भाग लिया। उनकी भागीदारी ने राजस्थान की समृद्ध सैन्य विरासत को रेखांकित किया।
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