प्रकाशित: 20 नवंबर 2025राजस्थान
राजस्थान-अरब सागर संपर्क परियोजना: जालोर के निकट अंतर्देशीय बंदरगाह की प्रारंभिक योजना शुरू
आधिकारिक रिकॉर्ड में जालोर अंतर्देशीय बंदरगाह और चैनल प्रस्ताव मिलता है, पर फरवरी 2024 के PIB उत्तर में कहा गया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-48 अपनी अंतिम व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार शिपिंग और नौवहन विकास के लिए व्यवहार्य नहीं पाया गया।
इस प्रस्ताव की चर्चा भू-आबद्ध राजस्थान, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान (जालोर, बाड़मेर) को कच्छ की खाड़ी की ओर जोड़ने और गुजरात के सुदूर बंदरगाहों (दीनदयाल बंदरगाह, मुंद्रा, पीपावाव) पर निर्भरता कम करने के संदर्भ में होती है। इससे राजस्थान के कपड़ा, सेरामिक, संगमरमर, खनिज, अभियांत्रिकी वस्तुओं और हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। कोई भी नौगम्य जलमार्ग विकास आधिकारिक व्यवहार्यता स्थिति के अधीन रहेगा।
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6-अक्ष वर्गीकरण
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान-अरब सागर संपर्क परियोजना में मुख्य घटनाक्रम क्या है?
मुख्य तथ्य यह है कि भू-आबद्ध राजस्थान को राष्ट्रीय जलमार्ग-48 और जालोर के निकट अंतर्देशीय बंदरगाह से अरब सागर से जोड़ने की योजना बताई गई है।
राजस्थान-अरब सागर संपर्क परियोजना के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
इसका उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर जालोर और बाड़मेर, को कच्छ की खाड़ी से जोड़ना और गुजरात के दूरस्थ बंदरगाहों पर निर्भरता घटाना बताया गया है।
भारत के लिए इसका व्यापक महत्व क्या है?
इससे राजस्थान के कपड़ा, सेरामिक, संगमरमर, खनिज, अभियांत्रिकी वस्तुओं और हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
इस परियोजना के बारे में अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य क्या है?
फरवरी 2024 के PIB उत्तर के अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग-48 को शिपिंग और नौवहन विकास के लिए व्यवहार्य नहीं पाया गया; इसलिए इस जलमार्ग पर नौवहन विकास उसकी आधिकारिक व्यवहार्यता स्थिति पर निर्भर है।
RAS और UPSC प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विषय राजस्थान के परिवहन संपर्क, अंतर्देशीय जलमार्ग और निर्यात लॉजिस्टिक्स से जुड़ा है, इसलिए राज्य अर्थव्यवस्था और अवसंरचना खंड में उपयोगी है।