आधिकारिक रिकॉर्ड में जालोर अंतर्देशीय बंदरगाह और चैनल प्रस्ताव मिलता है, पर फरवरी 2024 के PIB उत्तर में कहा गया कि राष्ट्रीय जलमार्ग-48 अपनी अंतिम व्यवहार्यता रिपोर्ट के अनुसार शिपिंग और नौवहन विकास के लिए व्यवहार्य नहीं पाया गया।

इस प्रस्ताव की चर्चा भू-आबद्ध राजस्थान, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान (जालोर, बाड़मेर) को कच्छ की खाड़ी की ओर जोड़ने और गुजरात के सुदूर बंदरगाहों (दीनदयाल बंदरगाह, मुंद्रा, पीपावाव) पर निर्भरता कम करने के संदर्भ में होती है। इससे राजस्थान के कपड़ा, सेरामिक, संगमरमर, खनिज, अभियांत्रिकी वस्तुओं और हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है। कोई भी नौगम्य जलमार्ग विकास आधिकारिक व्यवहार्यता स्थिति के अधीन रहेगा।