भारत में साइबर अपराध से नुकसान हर महीने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक; देश ने UN साइबर कन्वेंशन के अनुमोदन से इनकार किया
Aसीधा उत्तर
भारत में साइबर घटनाएं 2024 तक दोगुनी होकर 22.68 लाख हो गईं; डेटा संप्रभुता से जुड़ी चिंताओं के कारण UN साइबर कन्वेंशन की पुष्टि नहीं हुई।
मुख्य तथ्य
भारत ने 2024 में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए। यह वैश्विक साइबर शासन में गहरे मतभेदों को दर्शाता है।
भारत में साइबर घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख हो गईं; 2025 की शुरुआत में हर महीने ₹1,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
भारत को चिंता है कि सीमा-पार डेटा तक पहुँच से जुड़े प्रावधान डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत डेटा संप्रभुता से टकरा सकते हैं।
कन्वेंशन में साइबर अपराध की व्यापक परिभाषा का इस्तेमाल नागरिक स्वतंत्रताओं और खोजी पत्रकारिता को दबाने के लिए किया जा सकता है।
भारत साइबर अपराध से निपटने में सहयोग के लिए द्विपक्षीय पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (MLATs) को प्राथमिकता देता है।
27 जनवरी 2026 तक भारत ने 2024 में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। यह वैश्विक साइबर शासन में गहरे मतभेदों को दर्शाता है। भारत में साइबर घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख से तेज़ी से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख हो गईं, जबकि 2025 की शुरुआत में हर महीने ₹1,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।
भारत को चिंता है कि सीमा-पार डेटा तक पहुँच से जुड़े प्रावधान डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत डेटा संप्रभुता के सिद्धांतों से टकरा सकते हैं। कन्वेंशन में साइबर अपराध की व्यापक परिभाषा का इस्तेमाल नागरिक स्वतंत्रताओं और खोजी पत्रकारिता को दबाने के लिए किया जा सकता है। इसके बजाय भारत साइबर अपराध से निपटने में सहयोग के लिए द्विपक्षीय पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (MLATs) को प्राथमिकता देता है।
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27 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साइबर घटनाएँ 2022 में लगभग 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में कितनी हो गईं?
व्याख्या · सही उत्तर A
लेख के अनुसार साइबर घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख थीं, जो 2024 में बढ़कर 22.68 लाख हो गईं। 2025 की शुरुआत में मासिक हानि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक रही।
सत्यापित
स्रोत: स्रोत विवरण उपलब्ध नहीं है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में साइबर अपराध से हर महीने कितना वित्तीय नुकसान होता है और भारत ने 2024 के संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
भारत में **साइबर अपराध से हर महीने ₹1,000 करोड़ से अधिक** का नुकसान हो रहा है, यानी सालाना ₹12,000 करोड़ से अधिक। इससे भारत उन देशों में शामिल है जहाँ साइबर अपराध से होने वाला नुकसान सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद भारत ने **2024 में अपनाए गए संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए**। इसकी वजह **संप्रभुता** से जुड़ी चिंताएँ, **सीमा-पार डेटा साझा करने की बाध्यताएँ** और यह आशंका है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना विदेशी कानून-प्रवर्तन एजेंसियाँ भारत के डिजिटल बुनियादी ढाँचे तक पहुँच माँग सकती हैं।
साइबर अपराध पर बुडापेस्ट कन्वेंशन क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल नहीं हुआ?
**बुडापेस्ट कन्वेंशन**, यानी यूरोप परिषद का साइबर अपराध कन्वेंशन (2001), **साइबर अपराध से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग** का कानूनी ढाँचा है। इसमें डिजिटल साक्ष्यों का आदान-प्रदान, साइबर अपराधियों का प्रत्यर्पण और संचार की तत्काल निगरानी की अनुमति शामिल है। **68 से अधिक देशों** ने इसका अनुसमर्थन किया है। भारत के शामिल न होने के कारण हैं: (1) **संप्रभुता से जुड़ी चिंताएँ**—विदेशी सरकारें इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और तकनीकी कंपनियों को डेटा सौंपने के लिए बाध्य कर सकती हैं; (2) भारत **इस कन्वेंशन का मसौदा तैयार करने में शामिल नहीं था**; और (3) भारत यूरोप परिषद के नेतृत्व वाले कन्वेंशन के बजाय **संयुक्त राष्ट्र, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC)** के बहुपक्षीय ढाँचे को प्राथमिकता देता है।
भारत में वित्तीय नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख साइबर अपराध कौन-कौन से हैं?
भारत में हर महीने ₹1,000 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुँचाने वाले साइबर अपराधों के प्रमुख प्रकार हैं: (1) **निवेश के नाम पर ठगी**—सोशल मीडिया के ज़रिए फ़र्ज़ी ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म और पोंजी योजनाओं का प्रचार; (2) **ग्राहक पहचान सत्यापन (KYC) अपडेट के नाम पर ठगी**—बैंक या भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के नाम से फिशिंग संदेश भेजना; (3) **एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड (OTP) की धोखाधड़ी**—लोगों को पासवर्ड बताने के लिए फुसलाना; (4) **रोमांस के बहाने निवेश ठगी**—लंबे समय तक भरोसा जीतने के बाद फ़र्ज़ी क्रिप्टो निवेश कराना; (5) **नौकरी के नाम पर ठगी**—फ़र्ज़ी नौकरी के लिए अग्रिम फ़ीस लेना; और (6) **डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी**—पुलिस या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बनकर फिरौती माँगना। बड़े शहरों की **साइबर अपराध इकाइयों** को हर साल 3-5 लाख शिकायतें मिलती हैं।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) क्या है और यह साइबर अपराध से कैसे निपटता है?
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला **भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)** देश में साइबर अपराध रोकने का राष्ट्रीय केंद्र है। इसके प्रमुख कार्य हैं: (1) **राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल** (cybercrime.gov.in)—शिकायत दर्ज करने की केंद्रीकृत व्यवस्था; (2) **साइबर धोखाधड़ी शमन केंद्र (CFMC)**—बैंकों के साथ मिलकर धोखाधड़ी को तुरंत रोकना; (3) **संदिग्ध व्यक्तियों की रजिस्ट्री**; (4) **समन्वय मंच**—राज्यों के बीच साइबर अपराध की जाँच का समन्वय; और (5) **1930 हेल्पलाइन**—वित्तीय धोखाधड़ी पर तुरंत कार्रवाई। अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के मामलों में I4C **अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन (INTERPOL), अमेरिका के संघीय जाँच ब्यूरो (FBI) और यूरोपोल** के साथ समन्वय करता है।
भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति (NCSP) क्या है और यह वित्तीय साइबर अपराध से कैसे निपटती है?
भारत की **राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, 2013 (NCSP)**, जिसे **NCSP 2.0** के रूप में संशोधित किया जा रहा है, इसके दायरे में ये व्यवस्थाएँ आती हैं: (1) **भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In)**—साइबर घटनाओं से निपटने वाली राष्ट्रीय एजेंसी; (2) **राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC)**; (3) **साइबर स्वच्छता केंद्र**—बॉटनेट की सफ़ाई; और (4) महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनिवार्य **साइबर सुरक्षा ऑडिट**। वित्तीय साइबर अपराध रोकने के नए उपायों में **एक ही उपकरण से किए जाने वाले बैंकिंग लेनदेन की सीमा**, **सिम बदलने पर पाबंदियाँ**, धोखाधड़ी वाली कॉल की पहचान के लिए **भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा कॉल करने वाले की पहचान दिखाने की अनिवार्य व्यवस्था** और **साइबर क्राइम वॉरियर्स कार्यक्रम** के तहत **डिजिटल साक्षरता अभियान** शामिल हैं।
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