प्रकाशित: 26 जनवरी 2026शासन
भारत में साइबर अपराध से नुकसान हर महीने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक; देश ने UN साइबर कन्वेंशन के अनुमोदन से इनकार किया
27 जनवरी 2026 के करेंट अफेयर्स विवरण के अनुसार, भारत ने 2024 में अपनाए गए UN साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर नहीं किए। भारत में साइबर घटनाएं 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख हो गईं, और 2025 की शुरुआत में मासिक नुकसान 1,000 करोड़ से अधिक रहा।
भारत की चिंताओं में सीमा पार डेटा तक पहुंच से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जो DPDP Act 2023 के डेटा संप्रभुता सिद्धांतों से टकरा सकते हैं। कन्वेंशन में साइबर अपराध की व्यापक परिभाषा का उपयोग नागरिक स्वतंत्रताओं को दबाने के लिए हो सकता है। भारत साइबर अपराध सहयोग के लिए द्विपक्षीय MLAT को प्राथमिकता देता है।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
27 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में साइबर घटनाएँ 2022 में लगभग 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में कितनी हो गईं?
व्याख्या · सही उत्तर Aलेख के अनुसार साइबर घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख थीं, जो 2024 में बढ़कर 22.68 लाख हो गईं। 2025 की शुरुआत में मासिक हानि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक रही।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की मासिक साइबर अपराध से वित्तीय हानि कितनी है और भारत UNCAC Budapest Convention को क्यों स्वीकार नहीं करता?
भारत को **साइबर अपराध से प्रति माह 1,000 करोड़ रुपये से अधिक** की हानि हो रही है, यानी सालाना 12,000+ करोड़। इसके बावजूद, भारत ने **बुडापेस्ट साइबरक्राइम कन्वेंशन** का अनुसमर्थन नहीं किया है, क्योंकि उसे **संप्रभुता** से जुड़ी चिंताएँ हैं, **सीमा पार डेटा साझा करने की बाध्यताओं** पर आपत्ति है और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भारतीय डिजिटल बुनियादी ढांचे तक पहुँच मिलने की आशंका है।
बुडापेस्ट कन्वेंशन ऑन साइबरक्राइम क्या है और भारत इसमें क्यों शामिल नहीं हुआ?
**बुडापेस्ट कन्वेंशन** (Council of Europe, 2001) **साइबरक्राइम में सहयोग** के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनी ढांचा है। **68+ देशों** ने इसे अनुसमर्थित किया है। भारत के शामिल न होने के कारण: (1) **संप्रभुता से जुड़ी चिंताएँ** — विदेशी सरकारें ISP और तकनीकी कंपनियों से डेटा ले सकती हैं; (2) भारत **मसौदे में शामिल नहीं था**; (3) भारत Council of Europe के नेतृत्व वाले ढांचे के बजाय **UN (UNODC)** ढांचे को प्राथमिकता देता है।
भारत में वित्तीय नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख साइबरक्राइम कौन-कौन से हैं?
भारत में 1,000 करोड़+ मासिक हानि पहुँचाने वाले प्रमुख साइबरक्राइम हैं: (1) **निवेश घोटाले** — नकली ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म; (2) **KYC अपडेट घोटाले** — फर्जी SMS; (3) **OTP धोखाधड़ी**; (4) **रोमांस स्कैम** — ‘पिग बुचरिंग’ वाला क्रिप्टो स्कैम; (5) **नौकरी धोखाधड़ी**; और (6) **डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी** — पुलिस/CBI की नकल। **साइबर सेल** को वार्षिक 3-5 लाख शिकायतें मिलती हैं।
इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) क्या है?
**I4C** **गृह मंत्रालय** के अंतर्गत साइबरक्राइम रोकथाम का राष्ट्रीय केंद्र है। प्रमुख कार्य: (1) **राष्ट्रीय साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल** (cybercrime.gov.in); (2) **CFMC** — बैंकों के साथ रियल-टाइम धोखाधड़ी रोकथाम; (3) **संदिग्ध रजिस्ट्री** डेटाबेस; (4) **1930 हेल्पलाइन** — वित्तीय धोखाधड़ी पर तत्काल कार्रवाई। I4C अंतर्राष्ट्रीय मामलों में **INTERPOL, FBI, Europol** के साथ समन्वय करता है।
भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति (NCSP) क्या है और यह वित्तीय साइबरक्राइम से कैसे निपटती है?
**NCSP 2013** (NCSP 2.0 में संशोधन हो रहा है) में ये शामिल हैं: **CERT-In** — साइबर घटना प्रतिक्रिया; **NCIIPC** — महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा; और **साइबर स्वच्छता केंद्र** (botnet सफाई)। वित्तीय साइबरक्राइम के लिए नए उपाय: **SIM swap प्रतिबंध**, **TRAI कॉलर ID** और **साइबर क्राइम वारियर्स** कार्यक्रम के तहत **डिजिटल साक्षरता** अभियान।