सिक्किम के पंगोलाखा वन्यजीव अभयारण्य में 20 जनवरी 2026 से लगी जंगल की आग परीक्षा की दृष्टि से पर्यावरण, आपदा-प्रबंधन और हिमालयी पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह अभयारण्य भारत-चीन सीमा के पास, पाकयोंग जिले में स्थित है। इस आग से लगभग 12 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई। क्षेत्रफल की दृष्टि से पंगोलाखा लगभग 128 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसे 2002 में स्थापित वन्यजीव अभयारण्य के रूप में दर्ज किया गया है।
इस घटना का महत्व केवल जले हुए क्षेत्र तक सीमित नहीं है। पंगोलाखा लाल पांडा, कस्तूरी मृग और कई स्थानिक पक्षी प्रजातियों का आवास है। ऐसे हिमालयी आवासों में आग से वनस्पति की संरचना, भोजन-स्रोत और छोटे जीवों के आवास प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए संरक्षण की दृष्टि से यह मामला वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया, स्थानीय निगरानी और आग के बाद आवास-पुनर्बहाली जैसे विषयों से जुड़ता है।
स्टैटिक जीके के लिए पंगोलाखा को सिक्किम के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों, पूर्वी हिमालयी जैव विविधता और सीमा-क्षेत्रीय संरक्षण से जोड़कर पढ़ना चाहिए। आधिकारिक जानकारी में इसे भारत और भूटान के बीच वन्यजीवों, विशेषकर बाघों, के लिए महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में भी बताया गया है। RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में यह तथ्य प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, प्रजाति और प्रभावित क्षेत्र के रूप में पूछा जा सकता है, जबकि मुख्य परीक्षा में हिमालयी राज्यों में वनाग्नि, संरक्षित क्षेत्रों की प्रशासनिक चुनौतियाँ और जैव विविधता संरक्षण के उदाहरण के रूप में काम आ सकता है।
