प्रकाशित: 10 सितंबर 2025RajRASराजस्थान
राष्ट्रीय वन शहीद दिवस: राजस्थान में 1730 के खेजड़ली नरसंहार को श्रद्धांजलि
11 सितंबर 2025 को एफआरआई, देहरादून के वनपाल स्मारक पर राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया गया। यह दिन राजस्थान में 1730 के खेजड़ली नरसंहार की याद में मनाया जाता है, जब जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के आदेश पर खेजड़ी पेड़ों को कटने से बचाने के लिए अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोई ग्रामीणों ने प्राण दिए।
अमृता देवी और उनकी तीन बेटियाँ पेड़ों से लिपटकर बलिदान देने वालों में सबसे आगे थीं। इस आंदोलन ने 1970 के दशक के चिपको आंदोलन को प्रेरित किया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस घोषित किया है। गुरु जम्भेश्वर द्वारा 1485 में स्थापित बिश्नोई समुदाय के 29 सिद्धांतों में कठोर पर्यावरण संरक्षण शामिल है।
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किसान दिवस किसकी जयंती पर मनाया जाता है?
व्याख्या · सही उत्तर Aकिसान दिवस (राष्ट्रीय किसान दिवस) 23 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय वन शहीद दिवस क्या है और खेजड़ली नरसंहार से इसका क्या संबंध है?
**राष्ट्रीय वन शहीद दिवस 11 सितंबर, 2025 को 'शहीदों को याद करना, संरक्षण...' विषय पर मनाया गया**। राष्ट्रीय वन शहीद दिवस 1730 के खेजड़ली नरसंहार का सम्मान करता है, जहाँ 363 बिश्नोई समुदाय के सदस्यों ने खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए अपनी जान दी।
1730 में राजस्थान के खेजड़ली नरसंहार में क्या हुआ?
**1730 में बिश्नोई समुदाय के 363 सदस्यों ने जोधपुर के महाराजा के सैनिकों से खेजड़ी पेड़ों की रक्षा करते हुए अपनी जान दी**। यह दिवस राजस्थान के 1730 के खेजड़ली नरसंहार की स्मृति से जुड़ा है, जब 363 बिश्नोई ग्रामीणों ने अपनी जान दी।
अमृता देवी कौन थीं और खेजड़ली नरसंहार में उन्हें क्यों याद किया जाता है?
**अमृता देवी बिश्नोई खेजड़ली नरसंहार की पहली शहीद थीं**, जिन्होंने एक पेड़ को गले लगाया और कहा 'कटा अंग फिर उगता है, मृत व्यक्ति नहीं'। खेजड़ली आंदोलन ने बाद में 1970 के दशक के चिपको आंदोलन को प्रेरित किया।
भारत के पर्यावरण संरक्षण इतिहास के लिए खेजड़ली नरसंहार का क्या महत्व है?
**पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस घोषित किया**। खेजड़ली का बलिदान विश्व की पहली पर्यावरण शहादत माना जाता है और इसने 1970 के दशक के चिपको आंदोलन को प्रेरित किया।
राजस्थान में वन्यजीव और वन संरक्षण में बिश्नोई समुदाय का क्या योगदान है?
गुरु जंभेश्वर द्वारा 1485 में स्थापित बिश्नोई समुदाय के 29 सिद्धांतों में पर्यावरण-संरक्षण पर कड़ा जोर है। बिश्नोई समुदाय सदियों से काले हिरण सहित वन्यजीवों की रक्षा कर रहा है, इसलिए उन्हें भारत के शुरुआती संरक्षणवादियों में गिना जाता है।