प्रकाशित: 14 सितंबर 2025PIBटॉपिक
रक्षा मंत्री ने रक्षा खरीद नियमावली (DPM) 2025 को मंजूरी दी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद नियमावली (DPM) 2025 को मंजूरी दी, जो DPM 2009 के बाद पहला बड़ा संशोधन है। नई नियमावली सशस्त्र बलों के लिए लगभग ₹1 लाख करोड़ के वार्षिक राजस्व खरीद व्यय को विनियमित करती है और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत पूंजीगत अधिग्रहण से अलग है।
प्रमुख सुधारों में खुली निविदा से पहले रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लेने की आवश्यकता समाप्त करना, फील्ड-स्तरीय वित्तीय अधिकारियों को उच्चतर मुख्यालय से अनुमति लिए बिना खरीद निर्णय लेने का अधिकार देना, और सेवा के दौरान नई मंजूरी के बिना अतिरिक्त मरम्मत की अनुमति देने वाला 15% 'कार्य वृद्धि' मार्जिन शामिल है। नियमावली का उद्देश्य MSMEs की भागीदारी बढ़ाना और सैन्य खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: रक्षा खरीद नियमावली 2025 द्वारा प्रस्तुत सुधारों तथा भारत के सशस्त्र बलों में सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों एवं खरीद की कुशलता पर उनके अपेक्षित प्रभाव का विश्लेषण करें।
उत्तर (50 शब्द):
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2009 के बाद पहली बार संशोधित रक्षा खरीद नियमावली 2025 मंजूर की, जिसके तहत लगभग ₹1 लाख करोड़ की वार्षिक राजस्व खरीद होती है। यह रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों से आपत्ति-रहित प्रमाणपत्र की आवश्यकता समाप्त करती है, क्षेत्रीय वित्तीय अधिकारियों को अधिकार देती है, 15% 'कार्य-वृद्धि' मार्जिन जोड़ती है और सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों की भागीदारी बढ़ाती है।
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व्याख्या · सही उत्तर Bसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने नव वर्ष 2026 संदेश में यह घोषणा की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रक्षा मंत्री से मंज़ूर हुई रक्षा खरीद नियमावली 2025 क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद नियमावली 2025 को मंजूरी दी। यह 2009 के बाद पहला व्यापक बदलाव है और रक्षा वस्तुओं एवं सेवाओं की राजस्व खरीद के नियम तय करती है।
रक्षा खरीद नियमावली 2025 को क्यों अपडेट किया गया और इसके मुख्य बदलाव क्या हैं?
यह लगभग ₹1 लाख करोड़ की वार्षिक राजस्व खरीद से जुड़ी प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने के लिए लाई गई है।
रक्षा खरीद नियमावली 2025 स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को कैसे बढ़ावा देती है?
यह नवाचार, स्वदेशीकरण, निजी उद्योग, स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की भागीदारी को बढ़ावा देती है तथा कुछ रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों से अनापत्ति प्रमाणपत्र की पूर्व-शर्त हटाती है।
भारत की रक्षा खरीद में पूंजीगत अधिग्रहण प्रक्रिया और रक्षा खरीद नियमावली में क्या अंतर है?
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया प्रमुख हथियारों और प्लेटफॉर्मों जैसी पूंजीगत खरीद से संबंधित है, जबकि रक्षा खरीद नियमावली स्पेयर, गोला-बारूद, उपभोग्य सामग्री और सेवाओं जैसी राजस्व खरीद से संबंधित है।
रक्षा में आत्मनिर्भर भारत क्या है और रक्षा खरीद नियमावली 2025 इसमें कैसे मदद करती है?
रक्षा में आत्मनिर्भरता का अर्थ आयात निर्भरता घटाकर घरेलू क्षमता बनाना है। यह नियमावली स्वदेशीकरण, तेज निर्णय और घरेलू उद्योग की व्यापक भागीदारी के जरिए इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती है।