राजस्थान सरकार ने 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश, 2025 से जुड़ी राजपत्र अधिसूचना जारी की। इस अध्यादेश का मुख्य उद्देश्य छोटे उल्लंघनों और तकनीकी गलतियों को आपराधिक मुकदमे या जेल की सजा जैसे कठोर परिणामों से अलग करना है। 11 राज्य अधिनियमों में ऐसे प्रावधानों से कारावास जैसे आपराधिक दंड हटाकर आर्थिक जुर्माने का रास्ता रखा गया है।

यह कदम अनुपालन को आसान बनाने और प्रक्रियागत चूक के अपराधीकरण को कम करने की कोशिश दिखाता है। अर्थव्यवस्था के स्तर पर इसका संबंध कारोबार के अनुकूल माहौल बनाने से है, क्योंकि छोटे या गैर-गंभीर उल्लंघनों पर जेल की आशंका कम होने से नागरिकों और व्यवसायों पर अनावश्यक दबाव घटता है। विधि और नीति के स्तर पर यह अनुपातिक दंड के विचार को सामने रखता है: गंभीर अपराध और तकनीकी गलती को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न राजस्थान की समसामयिकी, राज्य विधायी प्रक्रिया, सुशासन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और नियामकीय सुधारों से पूछे जा सकते हैं। प्रीलिम्स के लिए 12 दिसंबर 2025, 11 राज्य अधिनियम, आपराधिक दंड की जगह आर्थिक जुर्माना और अध्यादेश का नाम याद रखना उपयोगी है। मुख्य परीक्षा में इसे नागरिक-केंद्रित शासन, व्यापारिक माहौल, नागरिकों पर अनावश्यक दबाव घटाने और छोटे उल्लंघनों पर दंड की अनुपातिकता के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। अध्यादेश वाला पहलू संविधान के अनुच्छेद 213 से भी जुड़ता है, जिसके तहत राज्यपाल तत्काल कार्रवाई की स्थिति में अध्यादेश जारी कर सकते हैं।