इतालवी लक्जरी ब्रांड प्रादा ने कोल्हापुरी कारीगरों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए और सीमित संस्करण वाला कोल्हापुरी चप्पल संग्रह लॉन्च किया। इस संग्रह में 2,000 जोड़ी चप्पलें हैं और इनकी कीमत लगभग 800 यूरो ($930) है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में हाथ से बनने वाली ये चप्पलें फरवरी 2026 से दुनिया भर में प्रादा के चुनिंदा स्टोरों पर उपलब्ध होंगी।
कोल्हापुरी चप्पलों को 2019 में भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिला। यह टैग महाराष्ट्र और कर्नाटक के आठ जिलों के लिए है। इस शिल्प का इतिहास 12वीं-13वीं शताब्दी से जुड़ा है और शुरुआत में ये चप्पलें राजघरानों के लिए बनाई जाती थीं। गाय, भैंस या बकरी की खाल को वनस्पति-आधारित विधि से कमाकर तैयार किए गए चमड़े से ये चप्पलें पूरी तरह हाथ से बनाई जाती हैं। इनमें कीलों या कृत्रिम सामग्री का उपयोग नहीं होता।
यह सहयोग वैश्विक लक्जरी बाज़ार में भारत के GI-टैग वाले उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
