विश्व मृदा दिवस 5 दिसंबर 2025 को खाद्य सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र और मानव कल्याण में स्वस्थ मिट्टी की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देने के लिए मनाया गया। इस दिवस की स्थापना 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी। यह थाईलैंड के दिवंगत राजा भूमिबोल अदुल्यादेज के जन्मदिन पर पड़ता है, जो मृदा संरक्षण के समर्थक थे।

भारत मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है — कटाव, लवणता और पोषक तत्वों की कमी के कारण भारत की लगभग 30% भूमि क्षरित है। 2015 में शुरू की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किसानों को 23 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं। इन कार्डों में फ़सल के अनुसार पोषक तत्वों की सिफ़ारिशें दी गई हैं। राजस्थान के बड़े शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के कारण पश्चिमी जिलों में पवन कटाव और मृदा लवणता विशेष चुनौतियाँ हैं।