प्रकाशित: 14 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
SHANTI विधेयक लोकसभा में पेश: भारत ने परमाणु क्षेत्र निजी भागीदारी के लिए खोला
भारत को रूपांतरित करने के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और उन्नति (SHANTI) विधेयक, 2025 15 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया। यह विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को प्रतिस्थापित करता है।
प्रमुख प्रावधानों में निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्रों के संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और ईंधन निर्माण गतिविधियों में भागीदारी की अनुमति देना शामिल है। विधेयक परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक मान्यता देता है। बिजली क्षमता के आधार पर ₹100 करोड़ से ₹3,000 करोड़ तक की स्तरीय दायित्व संरचना प्रस्तावित है। भारत का लक्ष्य वर्तमान ~9 GW से 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: शांति विधेयक, 2025 के प्रमुख प्रावधानों तथा भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार लक्ष्य में इसके महत्व की चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
15 दिसंबर को लोकसभा में पेश शांति विधेयक 2025, परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 एवं नागरिक परमाणु दायित्व अधिनियम 2010 को प्रतिस्थापित करेगा। यह निजी भागीदारी की अनुमति देता है, एईआरबी को सांविधिक मान्यता देता है तथा 100-3,000 करोड़ रुपये का स्तरीकृत दायित्व प्रस्तावित करता है। भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य रखा है।
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15 दिसंबर को लोकसभा में प्रस्तुत शांति विधेयक, 2025 निम्नलिखित में से किन कानूनों की जगह लेता है?
1. परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962
2. नाभिकीय क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010
3. नाभिकीय सुरक्षा नियामक प्राधिकरण विधेयक, 2011
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व्याख्या · सही उत्तर Aशांति विधेयक, 2025 का पूरा आशय भारत के परिवर्तन के लिए नाभिकीय ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति है। यह परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नाभिकीय क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 को प्रतिस्थापित कर भारत के नाभिकीय विधिक ढाँचे को समेकित करता है। नाभिकीय सुरक्षा नियामक प्राधिकरण विधेयक, 2011 अलग विधेयक था और वह कभी पारित नहीं हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शांति विधेयक कब पेश किया गया और इसके नाम का क्या अर्थ है?
भारत को रूपांतरित करने के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और उन्नति (शांति) विधेयक, 2025 को 15 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया।
शांति विधेयक किन परमाणु कानूनों की जगह लेता है?
यह विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 की जगह लेता है। यह भारत के परमाणु कानूनी ढाँचे को समेकित और आधुनिक बनाता है।
शांति विधेयक के तहत निजी क्षेत्र की किन गतिविधियों की अनुमति है?
विधेयक निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्रों के संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और ईंधन निर्माण की चुनी हुई गतिविधियों में भागीदारी की अनुमति देता है।
विधेयक में नियामक मान्यता, दायित्व सीमा और परमाणु क्षमता से जुड़े कौन-से लक्ष्य दिए गए हैं?
विधेयक परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (एईआरबी) को वैधानिक मान्यता देता है और बिजली क्षमता के आधार पर 100 करोड़ रुपये से 3,000 करोड़ रुपये तक की अलग-अलग स्तरों वाली दायित्व व्यवस्था प्रस्तावित करता है। भारत का लक्ष्य वर्तमान करीब 9 गीगावाट से 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता तक पहुँचना है।