पे पॉइंट इंडिया नेटवर्क भारतीय रिज़र्व बैंक की केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली (सीपीएस) की सीधी सदस्यता पाने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी बन गई है। इसकी पुष्टि नियामक ने 24 अप्रैल 2026 की समाचार रिपोर्टों में की। यह ऐतिहासिक मंजूरी फिनटेक कंपनियों की प्रायोजक बैंकों पर वर्षों से चली आ रही निर्भरता को समाप्त करती है और पे पॉइंट इंडिया को RBI द्वारा संचालित दो प्रमुख प्रणालियों तक सीधी पहुंच देती है: बड़े मूल्य के रीयल-टाइम निधि अंतरण के लिए रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) प्रणाली और खुदरा बैच भुगतान के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) प्रणाली। कंपनी को अपना भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (आईएफएससी) भी आवंटित किया गया है तथा वह सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ चालू खाता और निपटान खाता दोनों रखेगी। इस मंजूरी से पहले सीपीएस तक सीधी पहुंच मुख्यतः अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड जैसे चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी, जबकि गैर-बैंक भुगतान प्रणाली प्रदाता उप-सदस्य के रूप में काम करते थे और हर लेनदेन प्रायोजक बैंक से होता था। गैर-बैंकों के लिए सीपीएस को चरणबद्ध ढंग से खोलना रिज़र्व बैंक के पेमेंट्स विज़न तथा 2021 के उस ढांचे के अनुरूप है, जिसने अधिकृत गैर-बैंक पीएसपी को सीपीएस में सदस्य के रूप में भाग लेने की अनुमति दी थी। सीधी सदस्यता से लेनदेन लागत घटती है, निधि अंतरण तेज होता है, डेटा सुरक्षा बेहतर होती है, पे पॉइंट इंडिया को निधि प्रवाह पर मजबूत नियंत्रण मिलता है तथा निपटान की अंतिमता से जुड़ा जोखिम कम होता है, जो पहले मध्यस्थ से लेनदेन होने पर पैदा होता था। यह घटनाक्रम भारत के भुगतान क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है। यह परिपक्व फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है, जिसमें गैर-बैंक संस्थाएं भी पारंपरिक बैंकों जैसी मुख्य अवसंरचना सुविधाएं प्राप्त कर सकती हैं।
पे पॉइंट इंडिया नेटवर्क 24 अप्रैल 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक की केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली की सीधी सदस्यता पाने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी बनी; RTGS और NEFT पहुंच के लिए RBI में चालू एवं निपटान खातों के साथ अपना IFSC कोड भी प्राप्त किया
पे पॉइंट इंडिया नेटवर्क 24 अप्रैल 2026 को RBI की केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली की सीधी सदस्यता पाने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी बनी। इसके पास अपना आईएफएससी कोड और RBI में चालू तथा निपटान खाते हैं। कंपनी को अब आरटीजीएस और एनईएफटी तक सीधी पहुंच मिल गई है, जिससे प्रायोजक बैंकों पर निर्भरता समाप्त हो गई। इससे लागत घटेगी, निपटान तेज होगा और रिज़र्व बैंक द्वारा सीपीएस को चरणबद्ध रूप से खोलने के तहत फिनटेक इकोसिस्टम की परिपक्वता का संकेत मिलता है।
मुख्य तथ्य
- पे पॉइंट इंडिया नेटवर्क RBI की केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली (सीपीएस) की सीधी सदस्यता प्राप्त करने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी बनी, जिसकी पुष्टि 24 अप्रैल 2026 की रिपोर्टों में हुई।
- इसे उच्च-मूल्य अंतरण के लिए रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) तथा खुदरा बैच भुगतान के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) तक सीधी पहुंच मिली।
- कंपनी को अपना भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (आईएफएससी) आवंटित किया गया है तथा RBI में सीधे चालू खाता और निपटान खाता रखे जाएंगे।
- पहले सीपीएस तक सीधी पहुंच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा NPCI और सीसीआईएल जैसे चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी, जबकि फिनटेक प्रायोजक बैंकों के माध्यम से उप-सदस्य के रूप में कार्य करते थे।
- यह उद्घाटन RBI के 2021 के उस ढांचे के अनुरूप है जो अधिकृत गैर-बैंक भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को सीपीएस में सदस्य बनने की अनुमति देता है।
- लाभों में कम लेनदेन लागत, तेज निधि अंतरण, बेहतर डेटा सुरक्षा और घटा हुआ निपटान-अंतिमता जोखिम शामिल हैं।
- यह कदम भारत के भुगतान परिदृश्य में संरचनात्मक बदलाव और परिपक्व फिनटेक पारिस्थितिकी का संकेत माना जा रहा है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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24 अप्रैल 2026 को पे पॉइंट इंडिया नेटवर्क की भारतीय रिज़र्व बैंक की केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली में सीधी सदस्यता की पुष्टि हुई। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पे पॉइंट इंडिया इस प्रणाली की सीधी सदस्यता पाने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी है। उसे अपना आईएफएससी कोड मिला है तथा आरबीआई में सीधे चालू और निपटान खाते आवंटित हुए हैं। 2. सीधी सदस्यता से पे पॉइंट इंडिया केवल राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण प्रणाली तक पहुँच सकती है, रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट प्रणाली तक नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा या कौन-से सही है/हैं?
कथन 1 सही है: पे पॉइंट इंडिया सीधी सीपीएस सदस्यता प्राप्त करने वाली पहली निजी फिनटेक है, जिसके पास अपना आईएफएससी कोड और आरबीआई में चालू एवं निपटान खाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि सीधी सीपीएस सदस्यता पे पॉइंट इंडिया को आरटीजीएस (उच्च-मूल्य रीयल-टाइम अंतरण) और एनईएफटी (खुदरा बैच भुगतान) दोनों तक पहुंच देती है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पे पॉइंट इंडिया के RBI सीपीएस में शामिल होने का क्या महत्व है?
यह केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली की सीधी सदस्यता प्राप्त करने वाली पहली निजी फिनटेक कंपनी है, जिससे आरटीजीएस और एनईएफटी पहुंच के लिए फिनटेक की प्रायोजक बैंकों पर निर्भरता समाप्त हुई।
पे पॉइंट इंडिया अब किन दो भुगतान प्रणालियों तक सीधे पहुंच सकती है?
इसे बड़े मूल्य के अंतरण के लिए रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और खुदरा बैच भुगतान के लिए राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) तक सीधी पहुंच मिली है।
पे पॉइंट इंडिया को RBI से कौन से अतिरिक्त प्रमाणपत्र मिले हैं?
इसे अपना भारतीय वित्तीय प्रणाली कोड (आईएफएससी) आवंटित किया गया है और यह सीधे RBI के साथ चालू खाता और निपटान खाता रखेगी।
केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली तक और किसे सीधी पहुंच है?
इस मंजूरी से पहले सीधी पहुंच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों तथा NPCI और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड जैसे चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी।
सीधी सीपीएस पहुंच के क्या लाभ हैं?
इससे लेनदेन लागत घटती है, निधि अंतरण तेज होता है, डेटा सुरक्षा बेहतर होती है, कंपनी को निधि प्रवाह पर मजबूत नियंत्रण मिलता है और निपटान की अंतिमता से जुड़ा जोखिम कम होता है।
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