प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को ऐतिहासिक बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया, जो पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। 8,070 करोड़ रुपये की लागत से बनी 51.38 किलोमीटर की यह लाइन 45 सुरंगों, 55 प्रमुख पुलों और 88 लघु पुलों से होकर गुजरती है और इसमें भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल भी शामिल है। PM मोदी ने सैरांग-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (2,510 किमी की यात्रा, ~43 घंटे) सहित तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी के लिहाज़ से यह परियोजना एक बड़ी उपलब्धि है।
PM मोदी ने मिजोरम की पहली रेलवे लाइन बैराबी-सैरांग का उद्घाटन किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को ऐतिहासिक बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया, जिससे मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ी। 8,070 करोड़ रुपये की लागत से बनी 51.38 किलोमीटर की यह लाइन 45 सुरंगों, 55 प्रमुख पुलों और 88 लघु पुलों से होकर गुजरती है; इसी मार्ग पर भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल भी है। PM मोदी ने सैरांग-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (2,510 किमी की यात्रा, ~43 घंटे) सहित तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत के रेल-संपर्क के लिए बड़ा मील का पत्थर है।
मुख्य तथ्य
- PM मोदी ने 13 सितंबर 2025 को मिजोरम को जोड़ने वाली बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया।
- 51.38 किमी लंबी लाइन 8,070 करोड़ की लागत से 48 सुरंगों और 55 प्रमुख पुलों के साथ बनी।
- मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ी।
- चुनौतीपूर्ण इलाके में भारत का दूसरा सबसे ऊंचा रेलवे पुल शामिल है।
- सैरांग-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शुरू हुई, जो 2,510 किमी की दूरी 43 घंटों में तय करती है।
- 1999 में परिकल्पित यह परियोजना पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी का मील का पत्थर है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने मिजोरम में जिस बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन किया, उसकी कुल लंबाई कितनी है?
बैराबी-सैरांग रेल लाइन 51.38 किमी लंबी है, जिसे 8,070 करोड़ रुपये की लागत से 48 सुरंगों और 55 प्रमुख पुलों के साथ बनाया गया।
स्रोत: News on Air / India TV News
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन कब और किसने किया, और मिजोरम के लिए इसका क्या महत्त्व है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन किया। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार मिजोरम की राजधानी आइजोल को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है।
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के निर्माण की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
51.38 किमी लंबी यह लाइन 8,070 करोड़ रुपये की लागत से बनी है और भारत के दूसरे सबसे ऊंचे रेलवे पुल सहित 48 सुरंगों, 55 प्रमुख पुलों और 87 लघु पुलों से होकर गुजरती है।
मिजोरम को दिल्ली से जोड़ने वाली कौन सी ट्रेन शुरू की गई, और इसकी दूरी व यात्रा समय क्या है?
सैरांग-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस शुरू की गई, जो 2,510 किमी की दूरी लगभग 43 घंटों में तय करती है।
बैराबी-सैरांग रेलवे परियोजना की परिकल्पना कब की गई थी और इसे पूरा होने में इतना समय क्यों लगा?
इस परियोजना की परिकल्पना 1999 में की गई थी। मिजोरम के अत्यंत चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र के कारण बड़ी संख्या में सुरंगें और पुल बनाने पड़े, इसलिए इसे पूरा होने में दो दशक से अधिक समय लगा।
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन पूर्वोत्तर भारत में संपर्क सुधारने में कैसे मदद करती है?
यह लाइन मिजोरम को, जहाँ पहले रेल सेवा नहीं थी, राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। इस तरह यह पूर्वोत्तर भारत के संपर्क में एक मील का पत्थर साबित हुई है और इससे आर्थिक विकास तथा क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
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