प्रकाशित: 22 मार्च 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स (AgriPV) को नई गति: PM-KUSUM आवंटन ₹5,000 करोड़ किया गया, 10 GW राष्ट्रीय AgriPV मिशन प्रस्तावित
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स — यानी एक ही भूमि पर सौर पैनलों और फसल उत्पादन को साथ जोड़ने वाली तकनीक — को मार्च 2026 में नीतिगत स्तर पर बड़ा जोर मिला। केंद्रीय बजट 2026–27 ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) का आवंटन लगभग दोगुना करके 5,000 करोड़ रुपये किया और नीतिगत परामर्शों में 10 गीगावाट के राष्ट्रीय कृषि-फोटोवोल्टाइक्स मिशन का प्रस्ताव किया गया है।
पीएम-कुसुम, 2019 में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई, में तीन घटक हैं — जमीन पर या ऊंचे ढांचे पर लगाए गए विकेन्द्रीकृत ग्रिड-संबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र (घटक क), अलग से लगाए गए सौर कृषि पंप (घटक ख), और ग्रिड-संबद्ध कृषि पंपों का सौरकरण, जिसमें फीडर-स्तर सौरकरण भी शामिल है (घटक ग)।
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स में सौर पैनल 2–4 मीटर की ऊँचाई पर लगाए जाते हैं, जिससे नीचे 20–30% छाया में फसल उगाई जा सकती है। यह छाया गर्मी के तनाव को कम करती है, जिससे छाया-सहिष्णु किस्मों की उपज बढ़ सकती है। भारत में अभी लगभग 50 कृषि-फोटोवोल्टाइक्स पायलट स्थापनाएँ हैं, जिनमें जोधपुर, राजस्थान का केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (ICAR-CAZRI) उल्लेखनीय है।
राजस्थान के लिए यह तकनीक विशेष रूप से प्रासंगिक है: राज्य में सौर विकिरण बहुत अधिक मिलता है, अर्धशुष्क कृषि भूमि प्रचुर है, पानी की भारी कमी है, और पीएम-कुसुम के तहत 1.2 लाख से अधिक सौर पंप स्थापित हो चुके हैं। इस तकनीक से किसान की आय 30% से अधिक बढ़ सकती है।
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केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएम-कुसुम का आवंटन लगभग दोगुना करके कितनी राशि कर दिया गया?
व्याख्या · सही उत्तर Cकेंद्रीय बजट 2026-27 ने पीएम-कुसुम का आवंटन लगभग दोगुना करके 5,000 करोड़ रुपये कर दिया, जिससे कृषि-फोटोवोल्टिक तकनीक को मिल रहे बढ़ते नीतिगत समर्थन का संकेत मिलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स क्या है और इससे किसानों को क्या लाभ होता है?
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स ऐसी प्रणाली है जिसमें एक ही भूमि का दोहरा उपयोग होता है: सौर पैनल भी लगाए जाते हैं और फसल उत्पादन भी जारी रहता है। इससे किसानों को लाभ होता है, क्योंकि खेती चलती रहती है और सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आय भी मिलती है। अध्ययनों के अनुसार यह किसानों की आय 30% या अधिक बढ़ा सकती है, क्योंकि सौर पैनलों की आंशिक छाया गर्म जलवायु में जल वाष्पीकरण और फसल तनाव को भी कम करती है।
केंद्रीय बजट 2026–27 में पीएम-कुसुम में क्या बदलाव हुआ और प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन क्या है?
केंद्रीय बजट 2026–27 में पीएम-कुसुम आवंटन लगभग दोगुना कर 5,000 करोड़ रुपये किया गया ताकि सौर-कृषि एकीकरण को गति मिले। 10 गीगावाट का राष्ट्रीय कृषि-फोटोवोल्टाइक्स मिशन प्रस्तावित किया गया है, जो नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि आय नीतियों को जोड़ने की भारत की पहल को दर्शाता है।
पीएम-कुसुम क्या है और इसे कब शुरू किया गया था?
पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) 2019 में किसानों के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया। इसके तीन घटक हैं — विकेन्द्रीकृत भूमि-आधारित या ऊंचे ढांचे पर ग्रिड-संबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र, अलग से चलने वाले सौर कृषि पंप, और ग्रिड-संबद्ध कृषि पंपों का सौरकरण, जिसमें फीडर-स्तर सौरकरण भी शामिल है। यह योजना किसानों को स्वच्छ ऊर्जा देती है और ग्रिड को बेची गई अतिरिक्त सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आय भी उपलब्ध कराती है।
कृषि-फोटोवोल्टाइक्स के लिए राजस्थान प्राथमिकता राज्य क्यों है और ICAR-CAZRI जोधपुर की क्या भूमिका है?
राजस्थान में सौर विकिरण भारत में सबसे अधिक स्तरों में गिना जाता है, इसलिए यह कृषि-फोटोवोल्टाइक्स के लिए प्राथमिकता वाला राज्य है। जोधपुर का केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (ICAR-CAZRI) राजस्थान की अर्ध-शुष्क और मरुस्थलीय परिस्थितियों में सौर-कृषि एकीकरण की व्यवहार्यता और प्रभाव का अध्ययन करने के लिए पायलट परियोजनाएं चला रहा है।
ICAR-CAZRI क्या है और राजस्थान के कृषि एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ICAR-CAZRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद — केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान) जोधपुर, राजस्थान में स्थित है। यह देश का प्रमुख शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान संस्थान है। इसकी पायलट परियोजनाएँ इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे मरुस्थलीय और शुष्क भूमि परिस्थितियों में सौर-कृषि एकीकरण से जुड़ा स्थानीय रूप से उपयोगी डेटा तैयार करती हैं। यह डेटा सीधे राजस्थान की नीति-निर्माण प्रक्रिया को दिशा देता है और राज्य के बड़े शुष्क भूमि किसान समुदाय को लाभ पहुँचाता है।