प्रकाशित: 7 सितंबर 2025पर्यावरण
भारत के शहरों पर बढ़ता जलवायु खतरा: 2070 तक शहरी जनसंख्या 1 अरब होगी
8 सितंबर 2025 को एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि 2070 तक भारत की शहरी जनसंख्या लगभग 1 अरब तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें दो-तिहाई निवासी बाढ़ के प्रति संवेदनशील होंगे। शहरी जलवायु जोखिमों से आर्थिक नुकसान 2070 तक $30 अरब से अधिक हो सकता है।
कंक्रीट अवसंरचना के कारण शहरों में तापमान 3-5 डिग्री C अधिक रहता है (शहरी ताप द्वीप प्रभाव)। एक-चौथाई शहरी सड़कें बाढ़-प्रवण हैं; आंशिक जलमग्नता आधी परिवहन व्यवस्था को पंगु कर सकती है। भविष्य के 50% से अधिक आवास अभी निर्मित नहीं हुए हैं, इसलिए जलवायु-अनुकूल डिजाइन अपनाने का अवसर मौजूद है।
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जुड़ा प्रश्नआसान
सितंबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2070 तक भारत की अनुमानित शहरी जनसंख्या कितनी होगी?
व्याख्या · सही उत्तर Cविश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 2070 तक भारत की शहरी आबादी लगभग 1.1 अरब तक पहुँच सकती है। इतनी तेज शहरी वृद्धि के साथ बाढ़ और जलवायु जोखिम भी बढ़ेंगे, इसलिए टिकाऊ और सुरक्षित शहरी अवसंरचना नीति की बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2070 तक 1 अरब शहरी आबादी की ओर बढ़ते हुए भारत के शहरों को कौन से जलवायु जोखिम हैं?
भारत में 2070 तक शहरी आबादी 1 अरब तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में शहरों के सामने बाढ़, हीटवेव, जल संकट और वायु प्रदूषण जैसे जोखिम बढ़ रहे हैं।
2070 तक भारत की अनुमानित शहरी जनसंख्या क्या होगी?
**भारत की शहरी जनसंख्या 2070 तक 1 अरब तक पहुँचने का अनुमान है**, जबकि आज यह लगभग 50 करोड़ है। **शहरी जलवायु जोखिमों से होने वाला आर्थिक नुकसान 2070 तक 3,000 करोड़ डॉलर से अधिक हो सकता है**
कौन से भारतीय शहर जलवायु जोखिमों के प्रति सबसे संवेदनशील हैं?
**कंक्रीट के कारण शहरों में हीट आइलैंड प्रभाव बनता है, जिससे तापमान 3-5 डिग्री C ज़्यादा रहता है**। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और कोच्चि जैसे तटीय शहरों को बाढ़ का, जबकि दिल्ली और राजस्थान के शहरों को अत्यधिक गर्मी और जल संकट का सामना है।
भारतीय शहरों के लिए जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) क्या है?
**शहरी सड़कों का एक-चौथाई हिस्सा बाढ़ की चपेट में है; आंशिक जलभराव भी आधी परिवहन व्यवस्था को ठप कर सकता है**। NAPCC में सतत आवास के लिए राष्ट्रीय मिशन शामिल है, जिसका लक्ष्य ग्रीन बिल्डिंग और शहरी नियोजन से भारतीय शहरों को जलवायु-लचीला बनाना है।
भारत बढ़ते जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए अपने शहरों को कैसे अनुकूलित कर रहा है?
**भविष्य के 50% से अधिक आवास अभी बनने बाकी हैं, इसलिए जलवायु-लचीले डिज़ाइन का अवसर मौजूद है**। भारत शहरों के लिए शहरी बाढ़ प्रबंधन, हीट एक्शन प्लान, हरित बुनियादी ढाँचे और जलवायु-लचीले बिल्डिंग कोड में निवेश कर रहा है।