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RAS प्रश्न

नैनो-उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों से किस प्रकार भिन्न हैं?

सही उत्तर: (A) नैनो आकार के कणों के रूप में पोषक तत्व पहुँचाते हैं, जिससे अवशोषण बेहतर होता है और पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है।

नैनो-उर्वरक पारंपरिक उर्वरकों से इसलिए अलग हैं कि वे 1-100 nm स्तर के बहुत छोटे कणों में पोषक तत्व पहुंचाते हैं, जिससे पौधों में अवशोषण बेहतर होता है और पर्यावरणीय नुकसान घटता है।

  1. (A)

    नैनो आकार के कणों के रूप में पोषक तत्व पहुँचाते हैं, जिससे अवशोषण बेहतर होता है और पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है

  2. (B)

    पोषक तत्व पहुँचाने के लिए आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों का उपयोग करते हैं

  3. (C)

    विशेष सिंचाई प्रणालियों की आवश्यकता होती है

  4. (D)

    हमेशा जैविक संरचना के होते हैं

व्याख्या

नैनो-उर्वरकों की मुख्य पहचान यही है कि वे पोषक तत्वों को नैनोस्केल, यानी लगभग 1-100 nm आकार, में देते हैं। इतने छोटे आकार से सतह क्षेत्र बढ़ता है और पौधे पोषक तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से ले पाते हैं। ICAR के स्रोत में भी बताया गया है कि <100 nm आकार वाले नैनो-उर्वरक पोषक तत्वों की अधिक सटीक आपूर्ति करते हैं और पत्तियों के रंध्रों से भीतर तक प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए पोषक तत्व-उपयोग दक्षता बढ़ती है। पारंपरिक उर्वरकों में बड़ा हिस्सा रिसकर, बहकर, गैस के रूप में या मिट्टी में स्थिर होकर नष्ट हो सकता है, जिससे प्रदूषण होता है। इसी कारण सही विकल्प A है। IFFCO का नैनो यूरिया 2021 में लॉन्च हुआ विश्व का पहला नैनो-यूरिया तरल बताया गया है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) नैनो-उर्वरक की विशेषता नैनो-तकनीक से पोषक तत्व देना है, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों से पोषक तत्व पहुंचाना नहीं।
  • (C) प्रश्न में अंतर पोषक तत्वों के नैनो-आकार और बेहतर अवशोषण से जुड़ा है; विशेष सिंचाई प्रणाली नैनो-उर्वरक की अनिवार्य शर्त नहीं है।
  • (D) नैनो-उर्वरक हमेशा जैविक संरचना के नहीं होते, क्योंकि वे अजैविक नैनोकणों के रूप में भी हो सकते हैं।

अवधारणा

यह प्रश्न कृषि में नैनो-तकनीक और टिकाऊ खेती के अनुप्रयोग को जांचता है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि उर्वरक दक्षता, प्रदूषण में कमी और नई कृषि तकनीक विज्ञान एवं तकनीक के सीधे परीक्षा-योग्य मुद्दे हैं।

स्रोत

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