विश्व पैंगोलिन दिवस 2026: CITES रिपोर्ट में 8 वर्षों में दुनियाभर में 5.53 लाख पैंगोलिन जब्त; भारत के संरक्षण प्रयास रेखांकित
Aसीधा उत्तर
विश्व पैंगोलिन दिवस (21 फरवरी 2026) पर CITES रिपोर्ट में बताया गया कि 2016–2024 के बीच दुनियाभर में पैंगोलिन से जुड़ी 5,53,042 जब्तियां हुईं। भारत में पैंगोलिन WPA 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं। WTI ने मणिपुर-नागालैंड में 252 गांवों से संरक्षण समझौते प्राप्त किए।
मुख्य तथ्य
विश्व पैंगोलिन दिवस प्रतिवर्ष फरवरी के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है (2026: 21 फरवरी)।
CITES रिपोर्ट के अनुसार, 2016–2024 के बीच विश्वभर में पैंगोलिन की 5,53,042 जब्तियां हुईं।
भारतीय पैंगोलिन और चीनी पैंगोलिन दोनों WPA 1972 की अनुसूची I में संरक्षित प्रजातियां हैं।
भारतीय पैंगोलिन IUCN रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में है।
WTI ने मणिपुर-नागालैंड के 252 गांवों के साथ संरक्षण समझौते किए।
पैंगोलिन विश्व का सर्वाधिक तस्करी वाला स्तनधारी है, जिसे शल्कों और मांस के लिए मारा जाता है।
विश्व पैंगोलिन दिवस 21 फरवरी 2026 को — फरवरी के तीसरे शनिवार को — मनाया गया। इसी समय CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन) की नई रिपोर्ट 'पैंगोलिन के संरक्षण की स्थिति, व्यापार और प्रवर्तन प्रयास' प्रकाशित हुई। रिपोर्ट के अनुसार 2016–2024 के बीच दुनियाभर में 5,53,042 पैंगोलिन जब्त किए गए, और उस अवधि में मात्रा के हिसाब से जब्त किए गए वन्यजीव व्यापार का लगभग 99% हिस्सा पैंगोलिन के अंगों का था।
सभी आठ पैंगोलिन प्रजातियां CITES परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध हैं, जिसके कारण इनके व्यावसायिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर रोक है। भारत में भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) और चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित हैं। वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) ने मणिपुर और नागालैंड में 252 तांगखुल ग्राम नेताओं से शिकार और व्यापार पर प्रतिबंध की बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 2016-2024 के दौरान वैश्विक स्तर पर 5.53 लाख पैंगोलिन की जब्ती दिखाने वाली साइटीज़ रिपोर्ट और इस संकटग्रस्त प्रजाति के लिए भारत के संरक्षण ढांचे की चर्चा करें।
उत्तर (50 शब्द):
विश्व पैंगोलिन दिवस 2026 पर साइटीज़ ने बताया कि 2016-2024 के दौरान वैश्विक स्तर पर 5,53,042 पैंगोलिन जब्त हुए, जो जब्त वन्यजीव व्यापार का 99% हिस्सा हैं। सभी आठ प्रजातियां परिशिष्ट एक में सूचीबद्ध हैं। भारत के भारतीय और चीनी पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची एक में संरक्षित हैं, जबकि 252 तांगखुल ग्राम प्रमुखों से शिकार-रोधी प्रतिबद्धता प्राप्त हुई।
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विश्व पैंगोलिन दिवस 2026 पर प्रकाशित CITES रिपोर्ट के अनुसार 8 वर्षों में विश्व स्तर पर कितने पैंगोलिन जब्त किए गए?
व्याख्या · सही उत्तर C
CITES से जुड़ी रिपोर्ट में 2016 से 2024 के बीच अवैध व्यापार में जब्त किए गए लगभग 530,978 पैंगोलिन का उल्लेख था। यह करीब 5.31 लाख है, इसलिए विकल्प C सही है।
विश्व पैंगोलिन दिवस प्रतिवर्ष फरवरी के तीसरे शनिवार को मनाया जाता है (2026 में 21 फरवरी)। यह दिन पैंगोलिन — दुनिया के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले स्तनधारी — के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। यह पैंगोलिन की आठों प्रजातियों के सामने मौजूद खतरों को बताता है, जिन्हें शल्कों और मांस के लिए अवैध वन्यजीव व्यापार में बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जाता है।
2024 CITES रिपोर्ट ने वैश्विक पैंगोलिन जब्ती के बारे में क्या बताया?
CITES रिपोर्ट में बताया गया कि 2016 से 2024 के बीच दुनियाभर में 5,53,042 पैंगोलिन जब्त किए गए — यानी प्रति वर्ष औसतन 69,000 से अधिक। तस्करी का यह पैमाना बताता है कि पैंगोलिन की आठों प्रजातियां CITES परिशिष्ट I के तहत क्यों सूचीबद्ध हैं, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक व्यापार पर प्रतिबंध है। रिपोर्ट ने एशिया और अफ्रीका को पैंगोलिन तस्करी के मुख्य केंद्र के रूप में चिह्नित किया।
भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पैंगोलिन को क्या कानूनी संरक्षण मिला है?
भारत में भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) और चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla), दोनों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षण मिला है — यह कानूनी संरक्षण का उच्चतम स्तर है, जिसमें उल्लंघन पर बाघ और हाथी से जुड़े अपराधों जैसी सजा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, दोनों प्रजातियां CITES परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध हैं और IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में वर्गीकृत हैं।
मणिपुर और नागालैंड में पैंगोलिन संरक्षण के लिए WTI की रणनीति क्या है?
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) ने मणिपुर और नागालैंड के 252 गांवों के साथ स्वैच्छिक संरक्षण समझौते किए, जहां स्थानीय समुदाय पारंपरिक रूप से पैंगोलिन का शिकार करते थे। इन समझौतों के तहत गांवों ने पैंगोलिन का शिकार, पकड़ने या व्यापार न करने का संकल्प लिया। समुदायों की अगुवाई वाले इस मॉडल को पूर्वोत्तर भारत में वन्यजीव संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
भारतीय पैंगोलिन को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में क्यों रखा गया है?
भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) को IUCN रेड लिस्ट में मुख्य रूप से अवैध वन्यजीव व्यापार के लिए बड़े पैमाने पर शिकार के कारण संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। केराटिन से बने पैंगोलिन के शल्कों को लेकर पारंपरिक चीनी चिकित्सा में यह गलत धारणा है कि उनमें उपचारात्मक गुण होते हैं। आवास के नुकसान के साथ मिलकर इस दबाव से आबादी में तेज गिरावट आई है, और बेहतर संरक्षण के बिना इस प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा अधिक है।
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