भारत ने पहुँच और लाभ-बंटवारे से जुड़े नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। जैव विविधता सम्मेलन के तहत 2010 में अपनाया गया यह प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे के लिए पारदर्शी कानूनी ढाँचा देता है। भारत ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 बनाया, जिसमें 2023 में संशोधन किए गए, और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को सक्षम राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया। रिपोर्ट में पूर्व सूचित सहमति, आपसी सहमति से तय शर्तों और जैव विविधता से समृद्ध राज्यों के स्थानीय समुदायों के साथ लाभ-बंटवारे की नियामक व्यवस्थाएँ शामिल हैं। इन समुदायों में पारंपरिक ज्ञान धारक भी शामिल हैं।
नागोया प्रोटोकॉल कार्यान्वयन पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत
भारत ने आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और लाभों के बँटवारे के लिए नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की।
मुख्य तथ्य
- भारत ने पहुँच और लाभ-बंटवारे से जुड़े नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- जैव विविधता सम्मेलन के तहत 2010 में अपनाया गया नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे का ढाँचा देता है।
- भारत ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 बनाया, जिसमें 2023 में संशोधन किए गए, और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) को सक्षम राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया।
- रिपोर्ट में पूर्व सूचित सहमति, आपसी सहमति से तय शर्तों और पारंपरिक ज्ञान धारकों सहित स्थानीय समुदायों के साथ लाभ-बंटवारे की नियामक व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
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भारत ने हाल ही में किस अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की?
भारत ने नागोया प्रोटोकॉल (एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग) पर अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे 2010 में जैव विविधता पर कन्वेंशन के तहत अपनाया गया था। भारत का सक्षम राष्ट्रीय प्राधिकरण राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट में क्या शामिल है?
भारत ने **पहुँच और लाभ-बंटवारे से जुड़े नागोया प्रोटोकॉल** के कार्यान्वयन पर अपनी **पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट** प्रस्तुत की। रिपोर्ट में **पूर्व सूचित सहमति**, **आपसी सहमति से तय शर्तों** और जैव विविधता से समृद्ध राज्यों के स्थानीय समुदायों के साथ **लाभ-बंटवारे** की नियामक व्यवस्थाएँ शामिल हैं। इन समुदायों में **पारंपरिक ज्ञान धारक** भी शामिल हैं।
नागोया प्रोटोकॉल कब और किस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के तहत अपनाया गया?
**पहुँच और लाभ-बंटवारे से जुड़े नागोया प्रोटोकॉल** को **2010** में **जैव विविधता सम्मेलन (CBD)** के तहत अपनाया गया। यह **आनुवंशिक संसाधनों** के उपयोग से मिलने वाले लाभों के **निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे** के लिए पारदर्शी कानूनी ढाँचा देता है।
भारत में नागोया प्रोटोकॉल को लागू करने वाला राष्ट्रीय कानून कौन-सा है?
भारत ने **नागोया प्रोटोकॉल** को लागू करने के लिए **जैव विविधता अधिनियम, 2002** बनाया, जिसमें **2023 में महत्वपूर्ण संशोधन** किए गए। **राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)** भारत का **सक्षम राष्ट्रीय प्राधिकरण** है और पहुँच तथा लाभ-बंटवारे के नियमों को लागू कराता है।
भारत में नागोया प्रोटोकॉल को लागू करने में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की क्या भूमिका है?
**राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)** **नागोया प्रोटोकॉल** के तहत भारत का **सक्षम राष्ट्रीय प्राधिकरण** है। यह इन कार्यों की देखरेख करता है: - आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच देने से पहले समुदायों की **पूर्व सूचित सहमति** सुनिश्चित करना - लाभ-बंटवारे के लिए **आपसी सहमति से तय शर्तों** को लागू कराना - स्थानीय और मूलनिवासी समुदायों के **पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा**
नागोया प्रोटोकॉल के तहत पहुँच और लाभ-बंटवारे का क्या अर्थ है?
**नागोया प्रोटोकॉल** के तहत **पहुँच और लाभ-बंटवारा (ABS)** वह व्यवस्था है जो यह सुनिश्चित करती है कि **आनुवंशिक संसाधन** उपलब्ध कराने वाले देशों और समुदायों को उन संसाधनों के शोध या व्यावसायिक उपयोग से मिलने वाले लाभों में **निष्पक्ष और न्यायसंगत हिस्सा** मिले। भारत की **पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट** में **जैव विविधता अधिनियम, 2002** के तहत इस व्यवस्था के नियामक ढाँचे का विवरण है।
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