प्रकाशित: 12 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतशासन
भारत ने सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष और पहली महिला राज्यपाल
13 फरवरी 2026 को भारत ने सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई। 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में जन्मी सरोजिनी नायडू — 'भारत कोकिला' के नाम से प्रसिद्ध — भारतीय इतिहास की उन विशिष्ट महिलाओं में से एक थीं जिन्होंने साहित्यिक प्रतिभा और राष्ट्रवादी प्रतिबद्धता को एक साथ जोड़ा।
वे 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और महात्मा गांधी की घनिष्ठ सहयोगी थीं। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और दांडी मार्च (1930) सहित स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख आंदोलनों में भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद 1947 में वे संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) की पहली महिला राज्यपाल नियुक्त हुईं और 2 मार्च 1949 को अपनी मृत्यु तक इस पद पर रहीं।
उनकी प्रमुख रचनाओं में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' (1905), 'द बर्ड ऑफ टाइम' (1912) और 'द ब्रोकन विंग' (1917) शामिल हैं। 13 फरवरी को उनके सम्मान में राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सरोजिनी नायडू के योगदान और प्रथम महिला कांग्रेस अध्यक्ष तथा प्रथम महिला राज्यपाल के रूप में उनके महत्व की चर्चा करें।
उत्तर (50 शब्द):
13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में जन्मीं सरोजिनी नायडू 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1930 के दांडी मार्च में भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने 1947 से 1949 तक संयुक्त प्रांत की प्रथम महिला राज्यपाल के रूप में सेवा की।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में 13 फरवरी को राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?
भारत में 13 फरवरी को सरोजिनी नायडू की जयंती के सम्मान में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। उनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। नायडू एक अग्रणी कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन की अध्यक्षता (1925) करने वाली पहली महिला थीं। वे किसी राज्य की राज्यपाल बनने वाली भी पहली महिला थीं (संयुक्त प्रांत, 1947)।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सरोजिनी नायडू की क्या भूमिका थी?
सरोजिनी नायडू भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख नेत्री थीं। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक मार्च (दांडी मार्च), सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में भाग लिया। 1925 में कानपुर में INC के वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता करने वाली वे पहली महिला बनीं और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए देश भर की महिलाओं को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरोजिनी नायडू को 'भारत कोकिला' क्यों कहा जाता है?
सरोजिनी नायडू को उनकी उत्कृष्ट कविताओं के कारण 'भारत कोकिला' की उपाधि मिली। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'The Golden Threshold' (1905), 'The Bird of Time' (1912) और 'The Broken Wing' (1917) शामिल हैं। भारतीय जीवन, प्रकृति और परंपराओं के सुंदर चित्रण से भरी उनकी गीतात्मक कविता भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जाती थी।
स्वतंत्रता के बाद सरोजिनी नायडू ने शासन में कौन-सी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की?
भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में सरोजिनी नायडू को संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) की राज्यपाल नियुक्त किया गया और वे स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उन्होंने 2 मार्च 1949 को अपनी मृत्यु तक यह पद संभाला। इस तरह स्वतंत्रता के बाद भारतीय शासन में उन्होंने एक ऐतिहासिक स्थान बनाया।
RPSC RAS परीक्षा की तैयारी के लिए सरोजिनी नायडू की विरासत कैसे प्रासंगिक है?
सरोजिनी नायडू भारतीय इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक तथा राजनीतिक महत्वपूर्ण घटनाओं पर RAS परीक्षा के विषयों के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनकी प्रथमाएं — पहली महिला INC अध्यक्ष, पहली महिला राज्यपाल — अक्सर परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य हैं। राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में उनकी जयंती RAS पाठ्यक्रम के समसामयिक और सामाजिक कल्याण विषयों से भी जुड़ती है।