23 जनवरी 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पराक्रम दिवस (वीरता दिवस) के रूप में पूरे भारत में मनाई गई। संस्कृति मंत्रालय ने 23 से 25 जनवरी 2026 तक अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में केंद्रीय समारोह का आयोजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्य समारोह श्री विजय पुरम के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आयोजित हुआ। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का विशेष ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यहीं नेताजी की भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) ने नेताजी की 1943 की पोर्ट ब्लेयर यात्रा के दौरान 30 दिसंबर 1943 को स्वतंत्र भूमि पर पहली बार भारतीय तिरंगा फहराया था। समारोह में उस्ताद अमजद अली खान, पापोन, अमान अली बंगश और राघु दीक्षित सहित प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्कूली बच्चों की प्रस्तुतियां और एक शानदार ड्रोन शो शामिल थे। 24-25 जनवरी को ITF ग्राउंड पर नेताजी के जीवन और विरासत पर एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। साथ ही देश भर में नेताजी के जीवन से जुड़े 13 अन्य प्रतिष्ठित स्थानों पर स्मारक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पराक्रम दिवस की घोषणा भारत सरकार ने जनवरी 2021 में नेताजी की साहस, बलिदान और देशभक्ति की विरासत को सम्मानित करने और भारत के युवाओं को प्रेरित करने के लिए की थी।
पराक्रम दिवस 2026: भारत ने श्री विजय पुरम, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई
23 जनवरी 2026 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में पूरे भारत में मनाई गई। संस्कृति मंत्रालय ने 23 से 25 जनवरी 2026 तक अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में केंद्रीय समारोह आयोजित किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कार्यक्रम को संबोधित किया। मुख्य समारोह श्री विजय पुरम के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आयोजित हुआ। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह का विशेष ऐतिहासिक महत्व है — यहीं नेताजी की आज़ाद हिन्द फ़ौज ने 30 दिसंबर 1943 को पहली बार स्वतंत्र भूमि पर भारतीय तिरंगा फहराया था। समारोह में उस्ताद अमजद अली खान, पापोन और राघु दीक्षित सहित प्रख्यात कलाकारों की भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और शानदार ड्रोन शो शामिल रहे। 24-25 जनवरी को ITF ग्राउंड पर नेताजी के जीवन और विरासत पर महा प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। साथ ही देशभर में नेताजी से जुड़े 13 अन्य प्रतिष्ठित स्थानों पर स्मारक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पराक्रम दिवस की घोषणा भारत सरकार ने जनवरी 2021 में नेताजी के साहस, बलिदान और देशभक्ति की विरासत को सम्मान देने तथा युवाओं को प्रेरित करने के लिए की थी।
मुख्य तथ्य
- पराक्रम दिवस 2026 में 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई गई।
- मुख्य समारोह श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर), अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में आयोजित हुए।
- नेताजी की आज़ाद हिन्द फ़ौज ने 30 दिसंबर 1943 को अंडमान में पहली बार स्वतंत्र भूमि पर तिरंगा फहराया।
- प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जनवरी को कार्यक्रम को संबोधित किया; संस्कृति मंत्रालय का आयोजन 23 से 25 जनवरी तक चला।
- नेताजी से जुड़े देशभर के 13 प्रतिष्ठित स्थानों पर एक साथ स्मारक कार्यक्रम आयोजित हुए।
- पराक्रम दिवस की घोषणा भारत सरकार ने जनवरी 2021 में पहली बार की थी।
6-अक्ष वर्गीकरण
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान द्वीप समूह में मुक्त भारतीय भूमि पर भारतीय तिरंगा किस तारीख को फहराया था?
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को अंडमान द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में भारतीय तिरंगा फहराया था। इसे ब्रिटिश शासन से मुक्त घोषित भारतीय भूमि पर तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक घटना के रूप में याद किया जाता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पराक्रम दिवस क्या है और इसे हर साल 23 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?
पराक्रम दिवस प्रतिवर्ष 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। भारत सरकार ने नेताजी की अदम्य भावना और राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करने के लिए 2021 में पहली बार 23 जनवरी को पराक्रम दिवस घोषित किया।
पराक्रम दिवस 2026 के केंद्रीय समारोह कहाँ आयोजित हुए और उनका ऐतिहासिक महत्व क्या था?
पराक्रम दिवस 2026 के केंद्रीय समारोह 23 से 25 जनवरी तक अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) में आयोजित हुए। अंडमान द्वीपों का विशेष ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि यहीं नेताजी की आज़ाद हिन्द फ़ौज (INA) ने 30 दिसंबर 1943 को स्वतंत्र भारतीय भूमि पर पहली बार तिरंगा फहराया था।
1943 में नेताजी की आज़ाद हिन्द फ़ौज द्वारा तिरंगा फहराने का क्या महत्व था?
30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिन्द फ़ौज ने अंडमान द्वीपों में भारतीय तिरंगा फहराया। ब्रिटिश शासन से मुक्त भारतीय धरती पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। यह भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा का शक्तिशाली प्रतीक बना।
पराक्रम दिवस 2026 के लिए भारत में कितने स्थानों पर स्मारक कार्यक्रम आयोजित हुए?
पराक्रम दिवस 2026 के अवसर पर भारत में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े 13 प्रतिष्ठित स्थानों पर एक साथ स्मारक कार्यक्रम आयोजित हुए। संस्कृति मंत्रालय ने इन समारोहों का आयोजन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्य कार्यक्रम को संबोधित किया।
श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) का नाम क्यों बदला गया और स्वतंत्रता संग्राम से इसका क्या संबंध है?
पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजय पुरम किया गया ताकि भारत के स्वतंत्रता संग्राम से इसका ऐतिहासिक संबंध प्रतिबिंबित हो। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान INA द्वारा मुक्त कराया गया पहला भारतीय क्षेत्र यही था और यहाँ स्थित सेल्युलर जेल ने अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया था।
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